गुजरात यात्रा-3
बेट/भेट द्वारका/द्धारका के द्धीप पर भगवान श्रीकृष्ण का घर
देखकर वापिस वही आ गये जहाँ हमें ट्रेन ने छोड़ा था। ओखा के स्टेशन के पास से ही
द्धारकाधीश मन्दिर तक जाने के लिये निजी बसे थोड़े-थोड़े समय के अन्तराल पर चलती
रहती है। ऐसी ही एक बस में सवार होकर हम चारों भी द्धारका की ओर रवाना हो गये। इस
बस ने मुश्किल से आधा घन्टे में हमें उस स्थान पर उतार दिया था जहाँ से एक सीधा
मार्ग मन्दिर की ओर जाता है। चूंकि हमें अंधेरा तो बस में सवार होते समय ही हो गया
था इसलिए यहाँ पहुँचते समय रात जवान हो चुकी थी। हमने रात में यहाँ ठहरने का पहले
से ही सोचा हुआ था। इसलिये सबसे पहले एक ठीक-ठाक (साधारण) सा कमरा सोने के तलाश
करना शुरु कर दिया। पहले दो तीन धर्मशाला देखी गयी,
लेकिन किसी
में कमरा खाली नहीं मिला। एक जगह गये वहाँ बताया गया कि हम मुस्टंड़ों को कमरा
नहीं देते है। लेकिन हमें जल्द ही मन्दिर से पहले भद्रकाली रोड़ पर तीन बत्ती नामक
चौराहे के किनारे ही एक उचित दर वाला कमरा मिल गया था। यह भद्रकाली सड़क हाईवे से
सीधी मन्दिर की ओर जाती है। कहने को तो सड़क है लेकिन देखने में एक कालोनी की गली
जैसी ही है।
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यही मुख्य मन्दिर है। |
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ठीक सामने से लिया गया चित्र |