गुरुवार, 20 जून 2013

Village journey with Ape and Imali खेतों में लहलहाती फ़सल के बीच इमली व लंगूर

EAST COAST TO WEST COAST-17                                                                   SANDEEP PANWAR
शाम का समय था कैमरा मेरी जेब में ही था सोचा चलो सूर्यास्त के दो चार फ़ोटो ले लिये जाये। गाँव से खेत मुश्किल से एक किमी दूरी पर भी नहीं है जब घर से निकले तो सूर्य देवता आसमान में काफ़ी ऊपर लटके हुए अपनी सेब जैसी लाली बिखेर रहे थे। लेकिन पता नहीं क्या नाराजगी थी कि दो-तीन मिनट में हम खेत में पहुँच ही गये थे लेकिन सूर्य महाराज कहाँ गायब हो गये, आसमान से गिरकर कही नीचे खेतों में घुस चुके थे। मजबूरन उसी हालत में एक फ़ोटो लेकर अपना काम चलाना पड़ा। खेत में बाबूराव की गाय-भैसे बंधी रहती है गाँव के नजदीक खेत होने का लाभ खेत में ही पालतु पशु बाँध कर लिया जा रहा है। जब तक बाबू राव के छोटे भाई ने गाय व भैंस का दूध निकाला तब तक मैंने आसपास घूमते हुए फ़ोटो लेने जारी रखे। खेत में जहाँ पालतु पशु बंधे हुए थे उनके ठीक ऊपर इमली का एक विशाल पेड़ था जिसमें बहुत सारी इमली लटकी पड़ी थी। महाराष्ट्र में इमली के बडे-बड़े पेड़ जगह-जगह दिखाई देते रहते है। इमली के पेड़ के फ़ोटो लेकर आगे बढ़ा।





खेत में एक टुकड़ा खाली पड़ा हुआ था। इस इमली के पेड़ पर बहुत सारे लंगूर चढ़े हुए थे, जब कैमरे की फ़्लैश पेड़ पर गयी तो लंगूरों को लगा जैसे किसी ने पेड़ पर हमला कर दिया हो ड़र के मारे पेड़ से सारे लंगूर कूद कर खाली खेत की ओर भाग खड़े हुए। उन लंगूरों के पीछे मानव कैमरा लेकर पहुँच गया, लंगूर मुझे अपनी ओर आते देख आगे की ओर चलने लगे। जब लंगूर आगे बढ़ने लगे तो मजबूरन मुझे वही रुकना पड़ा। कैमरे के जूम से लंगूरों का फ़ोटो लेने का प्रयास कुछ हद तक सफ़ल भी रहा, लेकिन शाम का समय होने व लंगूर ज्यादा दूर होने के कारण उतना बेहतरीन फ़ोटो तो नहीं आ पाया जितनी इच्छा हो रही थी। यहाँ पर जूम की उतनी मजबूरी नहीं थी जितनी दिक्कत कम रोशनी की वजह से हो रही थी। कैमरे की ज्यादा तकनीकी जानकारी ना होने के कारण मैंने कैमरे से पंगा लेना उचित नहीं समझा। मोबाइल से फ़ोटो लेकर देखा तो उसमें तो सब कुछ काला काला आ रहा था।

इधर मैं लंगूरों में उलझा रहा उधर बाबूराव के भाई ने दूध निकाल कर डिब्बे में भर दिया था। जब तक मैं उनके पास वापिस आया तो उन्होंने कहा कि ताजा दूध पियोगे, मैंने कहा दूध तो पियूँगा लेकिन उससे पहले एक ताजा गन्ना (हरियाणवी में गन्ने को गान्ड़ा बोलते है।) की मिठास अपने उदर में समा लेना चाहता हूँ उसके बाद दूध के दो गिलास पिये जायेंगे। बाबूराव के छोटे भाई ने एक मोटा ताजा गन्ना लेकिन बहुत लम्बा गन्ना मुझे थमा दिया, उस गन्ने की लम्बाई लगभग आठ फ़ुट के करीब रही होगी। इतना लम्बा गन्ना अपने यहाँ कम ही देखने को मिलता है। उस गन्ने से निपटने में मुझे पन्द्रह मिनट का समय लग गया होगा। गन्ने को निपट कर फ़िर से बाइक स्टार्ट की ओर घर की ओर चल दिये। जाते समय काफ़ी रोशनी थी लेकिन वापसी में अंधेरा होना आरम्भ हो चुका था इसलिये बाइक की हैड़ लाइट जलाकर एक किमी की मंजिल तय की। घर पहुंचते ही तिड़के बोला क्या अबकी बार हमारे यहाँ नहीं रुकोगे? नहीं, मैं बाबूराव के यहाँ आया हूँ। इसलिये अबकी बार उनके यहाँ ही रुकना उचित रहेगा।

रात को बाबूराव के यहाँ सोने चला गया। सुबह जल्दी उठने की आदत के कारण संतोष को सोते हुए जगाया कि क्यों महाराज सोये पड़े हो? चलो तैयार हो जाओ खेत में चलना है। संतोष को तैयार होने की बोलकर मैं कैलाश के पास नहाने व सुबह का भोजन करने के लिये चल दिया। संतोष का घर बाबूराव के घर के बराबर में ही है जबकि कैलाश का घर बाबूराव के घर के ठीक सामने ही है। कैलाश के घर में जाकर बिल्कुल ऐसा लगता है जैसे दिल्ली वाले घर में बैठा हूँ। उनके यहाँ का रहना-खाना पीना सब कुछ शहरी वातावरण से मेल खाता है जबकि बाबूराव व संतोष के घर जाकर ठेठ मराठी परिवार में जाने का एहसास होता है इसलिये कैलाश के घर अपनापन ज्यादा लगता है। संतोष की घरवाली तो कामचलाऊ हिन्दी भी नहीं बोल पाती है। मेरा बैग भी कैलाश के घर पर रखा हुआ था इसलिये मेरा नहाना धोना वही हो रहा था जल्दी ही तैयार होकर संतोष के घर जा पहुँचा, वहाँ से उसकी बाइक पर सवार होकर उसके खेत घूमने के लिये चल दिये। मैं पहले भी दो बार संतोष के खेत देखकर आ चुका हूँ।

संतोष की बाइक मैं ही चला रहा था संतोष की बाइक और मेरी बाइक में गियर उल्टे सीधे है जिससे गियर ड़ालते समय निकल जाते थे। संतोष टोकता क्या गाड़ी चलानी भूल गये हो? संतोष के खेत उसके घर से लगभग सात-आठ किमी है। सड़क से उसके खेत तक पहुँचने के लिये लगभग आधा किमी बाइक खेतों की पगड़न्ड़ी पर ही चलानी पड़ती है। जब मैं पगड़न्ड़ी पर बाइक चलाते हुए उसके खेत में घुस चुका था तो एक मोड़ पर उसकी पानी वाली प्लास्टिक की पाइप लाइन का जोड़ बाइक के निचले हिस्से में अटक जाने से टूट गया। संतोष उस समय तो कुछ नहीं बोला, लेकिन वापसी में संतोष ने कहा कि मिस्त्री को इसे ठीक करने में कम से कम दो घन्टे का समय लग जायेगा। मेरी जरा सी लापरवाही से उनका नुक्सान हो चुका था। संतोष बोला तुम्हे बाइक चलानी दुबारा सीखनी होगी, क्योंकि तुम बाइक चलाते समय नुक्सान कर रहे हो।

इसके बाद हम संतोष के खेतों में काफ़ी दूर तक पैदक टहलते रहे। वहाँ फ़रवरी माह के महीने में ही गेहूँ की फ़सल पककर तैयार थी जो काटी जा रही थी। यह देखकर भी थोड़ा आश्चर्य हुआ था। हम एक के बाद एक खेत के किनारे से होकर चल रहे थे जिसमें केले के खेत, चने के खेत, अरन्ड़ी के खेत आदि कई प्रकार के खेतों में तैयार फ़सल देखते हुए चलते रहे। यहाँ अरन्ड़ी के पेड़ पर लगने वाले बड़े-बड़े बीजों के बारे में संतोष ने बताया था कि अरन्ड़ी के तेल से मोबाइल आयल तैयार किया जाता है। मैं तो सोचता था कि इससे सिर्फ़ साधारण तेल ही तैयार किया जाता होगा। यहाँ मैंने दो प्रकार की अरन्ड़ी की फ़सल देखी थी, एक फ़सल कांटे वाली थी दूसरी गंजी बिना कांटे वाली थी। संतोष के एक दोस्त का फ़ोन कई बार आ चुका था वह मुझे अपने गाँव व खेत दिखाना चाहता था। जब संतोष के दोस्त बसन्ता का कई बार फ़ोन आया तो उसे बता दिया हम संतोष के खेत में है बसन्ता खेत में मुझे लेन के लिये पहुँचने की बात बोल कर आधा घन्टा प्रतीक्षा करने की बोलने लगा। (क्रमश:)
विशाखापटनम-श्रीशैल-नान्देड़-बोम्बे-माथेरान यात्रा के आंध्रप्रदेश इलाके की यात्रा के क्रमवार लिंक नीचे दिये गये है।
15. महाराष्ट्र के एक गाँव में शादी की तैयारियाँ।
16. महाराष्ट्र की ग्रामीण शादी का आँखों देखा वर्णन।
17. महाराष्ट्र के एक गाँव के खेत-खलिहान की यात्रा।
18. महाराष्ट्र के गाँव में संतरे के बाग की यात्रा।
19. नान्देड़ का श्रीसचखन्ड़ गुरुद्धारा
20. नान्देड़ से बोम्बे/नेरल तक की रेल यात्रा।
21. नेरल से माथेरान तक छोटी रेल (जिसे टॉय ट्रेन भी कहते है) की यात्रा।
22. माथेरान का खन्ड़ाला व एलेक्जेन्ड़र पॉइन्ट।
23. माथेरान की खतरनाक वन ट्री हिल पहाड़ी पर चढ़ने का रोमांच।
24. माथेरान का पिसरनाथ मन्दिर व सेरलेक झील।
25. माथेरान का इको पॉइन्ट व वापसी यात्रा।
26. माथेरान से बोम्बे वाया वसई रोड़ मुम्बई लोकल की भीड़भरी यात्रा।
विशाखापटनम-श्रीशैल-नान्देड़-बोम्बे-माथेरान यात्रा के बोम्बे शहर की यात्रा के क्रमवार लिंक नीचे दिये गये है।
27. सिद्धी विनायक मन्दिर व हाजी अली की कब्र/दरगाह
28. महालक्ष्मी मन्दिर व धकलेश्वर मन्दिर, पाताली हनुमान।
29. मुम्बई का बाबुलनाथ मन्दिर
30. मुम्बई का सुन्दरतम हैंगिग गार्ड़न जिसे फ़िरोजशाह पार्क भी कहते है।
31. कमला नेहरु पार्क व बोम्बे की बस सेवा बेस्ट की सवारी
32. गिरगाँव चौपाटी, मरीन ड्राइव व नरीमन पॉइन्ट बीच
33. बोम्बे का महल जैसा रेलवे का छत्रपति शिवाजी टर्मिनल
34. बोम्बे का गेटवे ऑफ़ इन्डिया व ताज होटल।
35. मुम्बई लोकल ट्रेन की पूरी जानकारी सहित यात्रा।
36. बोम्बे से दिल्ली तक की यात्रा का वर्णन













अरण्ड़ी की चिकनी फ़सल

अरण्ड़ी की कांटेदार फ़सल


2 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सब बोलें तब प्रकृति बोलती।

प्रवीण कुमार गुप्ता-PRAVEEN KUMAR GUPTA ने कहा…

इमली का पद, इमली को इधर कटारा भी बोलते हैं. घुमक्कडी केवल पहाडो या महल किलो या मंदिरों में घूमना ही नहीं हैं. ये भी घुमक्कडी का एक पहलु ही हैं जो आप ग्रामीण परिवेश को दिखा रहे हो. धन्यवाद. माता जी को रोटी बनाते देख कर अम्मा कि याद आ गयी. उनके हाथ के बने हुए परांठे और रोटियों का ज़वाब नहीं...

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