शनिवार, 1 मार्च 2014

Sandeep Panwar's Life book Feb 2014 संदीप पवाँर की जीवनी-फ़रवरी २०१४

मार्च माह में आने वाले मुख्य त्यौहार व अवकाश निम्न है।

1O LATMAR HOLI BARSANA

11 LATMAR HOLI NANDGAIN
 
17 होली

18 रंगों की होली (दुल्हेन्ड़ी)

31 हिन्दी व तमिल नव वर्ष

मेरे साथ FEBRUARY 2014 में घटित होने वाला मुख्य घटनाक्रम फ़ोटो के नीचे है।



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आज अपने कुनबे के रिश्ते में चाचा (सगे चाचा नहीं) रामनाथ सिंह जी लगभग 10-11 वर्ष पश्चात हमारे घर पधारे। रामनाथ चाचा के पिताजी के देहांत के समय कुछ गड़बड़ हुई थी जिसके बाद आना-जाना बन्द हो गया। अब मेरी समझ में नहीं आ रहा है क्यों रामनाथ चाचा ने इतने वर्षों (10 साल) बाद आना-जाना शुरु करना चाहा है। जबकि अपनी आदत है कि जिससे एक बार बात बिगड़ गयी, उसके बाद वो अपने घर राजी, मैं अपने घर राजी।
सन 1997 में अपने पापा के असमय देहांत के उपराँत दुनिया की खूब चाल ढाल देखी है। मैंने तो ऐसे-ऐसे लोग भी देखे है जो मेरे पिता के जीवित रहते समय दिल्ली में अपने इलाज कराने के दौरान हमारे यहाँ महीनों तक ठहरे थे। ऐसे लोग पिता के देहांत के बाद आज तक नजर भी नहीं आये।
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आज नाँगलोई में संगीता पुरी जी व राजीव तनेजा द्वारा आयोजित सम्मेलन में शामिल हुए। अजय भाई को बाइक पर साथ ले जाने का न्यौता पहले ही दे दिया गया था। दोनों साथ गये व साथ आये।
रात को जोधपुर के पास रामदेवरा के रहने वाले सवाई सिंह का फ़ोन आया। 20 साल का छोरा अपुन की तरह मनमौजी बन्दा है। नैनीताल घूमने की इच्छा बतायी तो भीमताल में ओशो आश्रम रुकने की सलाह दी। सवाई सिंह ओशो में दिलचस्पी ले रहा है।
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आज दैनिक कार्य के अलावा कोई खास घटना नहीं हुई, अजय भाई का फ़ोन आया कुछ साधारण बातचीत हुई।
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आज कार्यालय में काफ़ी समय मिल गया। इसलिये कश्मीर यात्रा का लेखन समाप्त कर दिया।
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नानकसर में कार्यालय से घर आते समय कचौरी खायी गयी। अजय भाई मेरे कार्यालय दोपहर को ही आ चुके थे। खर्चा अजय भाई ने किया।
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आज रात जी न्यूज पर कुलधरा राजस्थान के भूतों के गाँव का सीधा प्रसारण दिखाया जा रहा था। बताते है कि दो सौ साल से भूतों ने गाँव में डेरा जमाया हुआ था। लेकिन जी न्यूज के कैमरे देख भूत भाग खडे हुए। टीवी पर डिबेट में एक पुजारी भूतों को बुलाने की बात पर अड़ा हुआ था। जब उसे कुछ नहीं सूझा तो हार्टबीट व स्पन्दन की बात पकड़ कर बैठ गया, लेकिन अगले दिन उसकी बोलती बन्द हो गयी। वह भूत नहीं बुला सका। राहुल सिन्हा इस कार्यक्रम को दिखा रहे थे। पुजारी ने यहाँ तक कह दिया कि विज्ञान ने धर्म का आड़म्बर बनाया है।
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आज शाम को नीमराणा के रहने वाले अशोक जी फ़ोन आया उन्होंने कहा कि संदीप जी आपको मेरे बुलावे पर हमारे यहाँ घूमने का न्यौता है। शादी का न्यौता होता तो मैं ना जाता, लेकिन घूमने का कैसे इन्कार कर सकता था। अशोक जी के साथ नाम बहरारी, सरिस्का वन जीव अभ्यारण, अजबगढ व भानगढ देखने का कार्यक्रम बनाया है।
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आज बाइक पर बैठते समय माताजी अपना संतुलन ना सम्भाल पायी। हुआ यू कि सामान ज्यादा था जिस कारण बाइक से माताजी पीठ के बल गिर गयी। सिर में चोट आयी। अगर किसी सड़क या पक्की जगह गिरती तो मामला गम्भीर हो सकता था।
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आज कार्यालय के काम में पूरा दिन बीत गया।
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नीरज का फ़ोन आया। नीरज ने कश्मीर हाऊसबोट व गाड़ी वालों के फ़ोन लेने के लिये फ़ोन किया था। शायद किसी ने कश्मीर की जानकारी पूछी होगी।
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अजय का दिन में फ़ोन आया शाम को फ़ोन करना आज बात करने का समय नहीं है।
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गाँव में कल शादी है लगातार फ़ोन आते रहे। ना मुझे जाना था ना मैंने फ़ोन रिसीव किया।
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सुबह माताजी और बच्चों को वैगन आर गाड़ी किराये पर करके गाँव भेज दिया। शादी सामरोह में हाजिरी लगाने के बाद माताजी मेरठ भाई के पास रुक जायेगी। श्रीमति और बच्चे दिल्ली आ जायेंगे।
शाम को नीमराणा से अशोक जी का फ़ोन आया कि संदीप जी आओगे ना।
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अजय कार्यालय आ गया। बोला भाई जी नीरज के यहाँ चलते है। चल भाई काफ़ी दिन हो गये उसके यहाँ पपीता खाते है।  नीरज को फ़ोन लगाया। पता लगा बन्दा बोम्बे वाली ट्रेन में सवार है। दो-तीन सप्ताह पहले फ़ोन लगाया था तो मिजोरम जाने के लिये ट्रेन में सवार मिला था।
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आज वजीराबाद पुल पर बहुत भयंकर जाम मिला लोग वापिस लौट रहे थे। सोचा चलो आज जाम में देखते है कितना समय खराब होगा? लेकिन गजब हो गया कि बाइक निकलने की जगह मिलती चली गयी जिससे मात्र पाँच मिनट में जाम से आगे निकल गया।
रात को बोम्बे से विशाल का फ़ोन, बोला संदीप भाई आपके श्रीनगर वाली यात्रा देखकर मेरी खोपड़ी खराब है मुझे भी श्रीनगर जाना है। विशाल का विचार लेह जाने का भी है लेकिन लेह तो मई के शुरुआत में ही सम्भव हो पायेगा। अभी तो श्रीनगर व हिमाचल ही घूमा जा सकता है।
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विशाल के साथ आधा घन्टे बातचीत हुई। विशाल ने श्रीनगर के साथ हिमाचल में तीन दिन घूमने का निर्णय कर लिया है टिकट भी बुक कर दी।
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रविवार का दिन था सुबह सचिन त्यागी का फ़ोन आया कि भाई जी आपसे मिलने का मन है बताओ कब और कहाँ मिलोगे? अजय भी सचिन को फ़ेसबुक के माध्यम से जानता है रुक भाई अजय से बात करता हूँ। लगे हाथ अजय से भी मिल लेना। अजय आज अपनी बुआ के यहाँ शादी में जा रहा था। हमारे पडौस में भी एक लड़के का मन्ड़ा था। मैंने सोचा था कि जाऊँगा लेकिन अपनी आदत अनुसार ऐन मौके पर जाना मना होना ही था। इसलिये तय हुआ कि फ़िर किसी दिन मुलाकात होगी।
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आज बाइक पर एक देश में सबसे लम्बी यात्रा वाले विश्व रिकार्ड़ धारी गुजरात, नवसारी के विष्णु मेहता जी का फ़ोन आया। विष्णु जी आगामी जून में लेह बाइक से जा रहे है। इसी सिलसिले में उन्होंने मुझसे बात की।
दोपहर बाद अजय के साथ नीरज के यहाँ पहुँचे। पहले पपीते की दावत सोची थी लेकिन पपीते वाले से सौदा बिगड़ने के कारण कचौरी-ब्रैड़ ले लिये गये। १०० रु में कुछ २४ रु बाकि बचे। नीरज के यहाँ गये। उसे खुल्ले पैसे देकर १०० रु ले लिये गये। नीरज के यहाँ घन्टा भर रुका गया। आजकल नीरज अपनी अलमारी में दारु की बोतल भी रखता है। बोतल किसके लिये थी नीरज ही जानता है।
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सबसे पहले मनु का फ़ोन आया। उसके बाद अशोक जी फ़ोन आया। उसके बाद फ़िर मनु का फ़ोन आया। उसके बाद राजेश सहरावत जी का फ़ोन आया। इसके बाद दे दना दन फ़ोन आते रहे। फ़ोन पर गुस्सा आने लगा। घुमक्कड़ी के बारे में फ़ोन आये तो अच्छा लगताअ लेकिन कार्यालय के काम से फ़ोन आते है तो बहुत बुरा लगता है।
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आज सुबह कार्यालय जाते समय एक जोड़ी कपड़े व कैमरा कार्यलाय साथ ले जायेंगे। कार्यलाय से घर नहीं आना है सीधे अलवर जाना है वहाँ अशोक के घर ठहरा जायेगा। जिसके बाद कल सुबह भानगढ व सरिस्का देखने चले जायेंगे।



4 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शनिवार (01-03-2014) को "सवालों से गुजरना जानते हैं" : चर्चा मंच : चर्चा अंक : 1538 में "अद्यतन लिंक" पर भी है!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बीच में दो तीन वर्ष डायरी नहीं लिख पाया, आपको पढ़कर उत्साह जगा है।

कविता रावत ने कहा…

जाने कितना कुछ घटित होता है हरदिन ..उसे याद रखने के लिए हर दिन लिखना हर किसी के बूते की बात नहीं ....और . जस का तस बताना तो बहुत कठिन है ...लेकिन आपको सिलसिलेवार पढ़ना अच्छा लगा ...

संजय भास्‍कर ने कहा…

वाकई पढ़कर उत्साह जगा है।

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