रविवार, 4 नवंबर 2018

Radha Raman Reti, Baldev ji Temple, Ras khan Tomb, 84 Khamba राधा रमन रेती, बलदेव जी मंदिर, रसखान समाधी, 84 खम्बा


मथुरा, भरतपुर व डीग यात्रा-02                           लेखक -SANDEEP PANWAR
इस यात्रा में आपको मथुरा के मुख्य दर्शनीय स्थलों के दर्शन कराये जा रहे है। मथुरा भ्रमण के उपरांत आपको भरतपुर का अजेय लोहागढ किला व महाराजा सूरजमल का डीग स्थित जल महल भी घूमाया जायेगा। इस यात्रा को आरम्भ से पढने के लिये यहाँ क्लिक करना न भूले। इस लेख की यात्रा दिनांक 11-09-2016 को की गयी थी।
MATHURA’S FAMOUS TOURIST SPOT/ PLACES/ TEMPLE मथुरा के मुख्य दर्शनीय स्थलों व मन्दिरों के दर्शन
इससे पहले वाले लेख में आपने वृंदावन के मुख्य स्थलों की सैर की थी। अब उससे आगे...


राधा रमण रेती मन्दिर
अब टीम के सभी एक दर्जन साथी एक साथ आ चुके थे। कुछ साथी तो सुबह ही आ गये थे। वृंदावन में अधिकतर साथी आ चुके थे। सत्यपाल चाहर जी राधा रमण मन्दिर पहुँचकर हमारी टोली में शामिल हो गये। यहाँ पहुँचकर सबसे ज्यादा आनन्द आया। पूरी मंडली डेरा जमा चुकी हो तो धमाल मचाने का अलग ही लुत्फ होता हैं। इस बात को सिर्फ धमाल-चौकड़ी करने वाले ही महसूस कर सकते हैं। कुछ देर तक फोटो का दौर चला। फोटो से निपटकर तालाब में थकान उतारने चल दिये। यहाँ का तालाब काफा बड़ा है। तालाब किनारे से पानी में घुसते ही डेढ-डेढ फुट की चार सीढियां उतरते ही डूबने का खतरा हो गया।
किनारे के कुछ चार-पांच मीटर बाद ही लोहे की जाली लगाकर गहरे में जाने से रोका गया है। हमने उन जाली के भीतर ही स्नान किया। यहाँ तैरने का पूरा आनन्द लिया गया। घंटे भर में नहा-धोकर बाहर आये और रमण रेती आश्रम देखने चल दिये। काफी शानदार आश्रम है। इस आश्रम में वातानुकूलित कक्ष भी बनाये हुए है। इस यात्रा के दौरान तो यहां ठहरने का समय नहीं था लेकिन  दो साल बाद 84 कोस पद यात्रा के समय एक रात्रि यहां ठहरा था। बडी भयानक बीती थी वो रात। उस रात की बात फिर कभी होगी। यहाँ आश्रम में घूमते समय उस जगह को देखना आवश्यक था जिसके नाम पर इसका नाम रमण रेती पडा। मुख्य भवन के दायी ओर यमुना रेत में कुछ भक्त जन लुटलुटी लगाने में व्यस्त दिखे। क्या बच्चा, क्या बूढा, क्या महिला, क्या जवान, सभी उम्र के नर-नारी यहां रमण रेती में लोट-पोट हो रहे थे। यदि हम कुछ देर पहले नहाकर नहीं आये होते तो हम भी यहां लुट-लुटी लगा रहे होते। रमण रेती की महिमा को प्रणाम कर आगे बढते है।
बलदेव जाते समय केसी घाट
अब हमारी टोली केसी घाट पहुंच जाती है। वहां के पुजारी जी किसी भक्त को इस घाट पर यमुना में स्नान करने से मिलने वाले ढेर सारे पुण्य के बारे में समझा रहे थे। भले ही स्थानीय कारणों से वहां स्नान करना बहुत पुण्य का काम समझा जाता है। मेरी सोच इस मामले में उनसे अलग है। मैं केवल इसी घाट पर स्नान को ही पुण्य नहीं समझता हूँ। मैं स्वयं यमुना किनारे के गाँव (शबगा गाँव, छपरौली, बागपत) का वासी हूँ। आज भी यमुना किनारे (जगतपुर गाँव, दिल्ली-84) ही रहता हूँ। जहाँ आप श्रद्धा से स्नान करने के लिये नदी में प्रवेश करते हो, वही स्थान पवित्र हो जाता है। ज्यादा सोचने की आवश्यकता नहीं है। समुद्र में दुनिया भर की नदियां गंदगी बहाकर ले जाती है। इसके बावजूद भी हम समुन्द्र में जाकर घंटों स्नान करते है। अंधेरा होने वाला है चलो, अब श्रीकृष्ण जी के बडके भैया बलदेव जी का मंदिर देखने चलते है।
बलदेव जी का मन्दिर
बलदेव जी पहुँचते ही हमारे स्वागत के लिये गाँव के प्रधान जी श्री योगेन्द्र सिकरवार उर्फ योगी भाई मन्दिर परिसर में मौजूद थे। प्रधान जी ने हमारा स्वागत बलदेव जी के नाम लिखे पटके हमारे देकर किया। बलदेव मंदिर से वापसी के समय बाहर निकलते ही ढेर सारी मिठाई की दुकाने है। जब-जब मेरा यहां आना हुआ है। तब-तब मिठाई से मुझे गले तक फुल होकर ही आगे बढने की अनुमति मिली है। एक नेक सलाह है यदि आप यहां आ रहे है तो या तो चुपचाप आकर निकल जाओ। यदि यहां के भाईयों (मथुरा नरेश चौधरी, अमित लावनिया व के के चौधरी) तक सूचना पहुँच गयी तो मेरी सलाह है कि भूखे पेट मथुरा जाने में ही भलाई है। यहाँ की विशेष मिठाई खीर मोहन व रबडी-मावे का भी स्वाद लिया गया। नरेश भाई ने लगे हाथ मोड पर कोने वाली दुकान के स्पेशल समौसे भी चखा ही दिये।
रात्रि विश्राम
अंधेरा हो गया था। अब भोजन करने की बारी आ गयी थी। एक दर्जन साथियों के साथ रात में किसी भाई के घर रात के भोजन पर जा धमकना भी आतंकी हमले से कम नहीं समझना चाहिेए। इसलिए पहले एक ढाबे पर पहुँचे। यहाँ के के भाई ने मेजबान बन सभी को भोजन कराया। भोजन के उपरांत के के भाई के आई टी आई कालेज के खुले प्रांगण में रात्रि विश्राम करने पहुँच गये। रात्रि विश्राम के बाद कल भरतपुर के लोहागढ किले व डीग के जल महल देखने के लिये पहले ही योजना बन चुकी थी।
रात्रि विश्राम के बाद सुबह सभी नहाने के लिए आटीआई के सबमर्सिबल पर नहा-धोकर खेलने लग गये।
खेल कूद- बैडमिंटन-वालीवाल का मैच
कल रात खुले में जबरस्त नींद आयी थी। गुरूदेव सत्यपाल चाहर जी व अन्य कुछ भाई धर्म पर चर्चा करने में व्यस्त हो गये थे कि उन्हें कब नींद आयी होगी, वे ही जानते है। कालेज के प्रांगण में बालीवाल व बैडमिंटन के नेट बंधे देख कर हमारी टीम दो खेमे में बंट गयी। पहले घंटे बालीवाल पर हाथ आजमाये गये। अगले घंटे बैडमिंटन पर जोरदार जोर आजमाइश हुई। दोनों टीमे एक-एक मैच जीत कर बराबरी पर रही। शाम को तीसरा मैच कबड्डी का भी होगा, वो डींग के जल महल के अंदर खेला जायेगा।
रसखान की समाधी
रसखान की समाधी भी रास्ते में पडती है तो लगे हाथ उसे भी देखते हुए आगे बढते है। हम भरतपुर की ओर बढ रहे थे कि सडक किनारे एक बोर्ड दिखाई दिया, जिस पर लिखा था कि कवि रसखान का समाधी स्थल। समय की कमी हमारे पास नहीं थी। गाडी रसखान की समाधी की ओर मोड दी गयी। यहाँ पहुँचने के लिए आधा किमी पैदल भी चलना पडा। घनघोर जंगल में एक छोटी सी कब्र मिली। लाल पत्थरों से बनी समाधी सनसान जंगल में स्थित है। कब्र के पास ही एक वाच टावर दिखाई दिया। वहाँ से दूर के नजारे दिखाई दे रहे थे। सारे साथी वाच टावर पर जा चढे। टावर डगमगाता महसूस हो रहा था। थोडी देर वहाँ ठहरकर ही नीचे उतरे।
चौरासी खम्बा
चौरासी खम्बा नामक मंदिर भी सडक किनारे ही है तो कुछ देर का समय निकाल कर इसे भी देख लिया गया। यह मंदिर बडे-बडे पत्थरों से बनाया गया है। आजकल इस मंदिर पर ठग टाईप कर्मचारिेयों का कब्जा है। पुजारी जी अपने काम में व्यस्त थे तो ये ठग कर्मचारी भक्तों से रूपये ऐठने में मस्त थे। ऐसे ही एक कर्मचारी के साथ हम उलझ पडे। नरेश व केके भाई के स्थानीय बोली बोलते ही उसका जोश ठण्डा पड गया था। हिंदी बोलने वालों के साथ तो वह अलग लहजे में बोल रहा था।
अब आगामी लेख में हम भरतपुर के लोहागढ किले व डीग के जल महल देखने के लिये प्रस्थान करते है।....... 
आओ स्नान करे।



रेती में लोटपोट

रमन रेती के सन्यासी

पहले कुछ टानिक पीकर तो आते

मनमौजी टोली

तुझे खा जाऊँगा


बलदेव जी में

84 कोस का मैप

टैंकर से बच गयी तो हमारे लिए बचेगी

बैडमिंटन के माहिर खिलाडी

वालीवाल में दमखम दिखाते हुए

वृक्ष की महत्ता


रस की खान

अभी लेता हूँ

एंगल आना चाहिए

आ अब रेल आगे बढाये...

4 टिप्‍पणियां:

RADHA TIWARI ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (05-11-2018) को "धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएँ" (चर्चा अंक-3146) पर भी होगी।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
राधा तिवारी

शिवम् मिश्रा ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 04/11/2018 की बुलेटिन, " दादा जी, फेसबुक और मंदाकिनी “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

संजय भास्‍कर ने कहा…

दीपोत्सव की अनंत मंगलकामनाएं !!

Unknown ने कहा…

Sandeep ji bahut dino baad aapne naya blog likha ....kripya mahine me kam se kam ek blog jarur likhen ....aapke yatra blog padhne me kaafi anand milta hai

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