रविवार, 15 जून 2014

Khajuraho- Jain group of temples जैन मन्दिर समूह- आदिनाथ व पार्श्वनाथ

KHAJURAHO-ORCHA-JHANSI-04

आज के लेख में दिनांक 27-04-2014 की यात्रा के बारे में बताया जा रहा है। खजुराहो के संसार भर में मशहूर पश्चिमी समूह के मन्दिर देखने के उपरांत वहाँ के अन्य मन्दिर देखने के क्रम में चतुर्भुज मन्दिर व दूल्हा देव मन्दिर के बाद अब पूर्वी समूह के अंतर्गत आने वाले जैन मन्दिर समूह मन्दिर देखने पहुँच गया। अपना बैग ऑटो वाले के पास ही छोड दिया। कैमरा हाथ में लेकर मन्दिर के प्रवेश दवार पर पहुँच गया। यहाँ मन्दिर में घुसने से ठीक पहले लगे एक बोर्ड से जानकारी मिली कि यह मन्दिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण भोपाल मण्डल के अधीन है। जब मेरी नजर प्रवेश द्वार पर गयी तो एक पल को लगा कि मैं किसी धर्मशाला में आ गया हूँ। अन्दर जाते ही उल्टे हाथ बने स्वागत कक्ष में दो कर्मचारी दिखायी दिये। मैंने कहा, मुझे मन्दिर देखना है उसका टिकट कहाँ मिलेगा?
इस यात्रा के सभी लेख के लिंक यहाँ है।01-दिल्ली से खजुराहो तक की यात्रा का वर्णन
02-खजुराहो के पश्चिमी समूह के विवादास्पद (sexy) मन्दिर समूह के दर्शन
03-खजुराहो के चतुर्भुज व दूल्हा देव मन्दिर की सैर।
04-खजुराहो के जैन समूह मन्दिर परिसर में पार्श्वनाथ, आदिनाथ मन्दिर के दर्शन।
05-खजुराहो के वामन व ज्वारी मन्दिर
06-खजुराहो से ओरछा तक सवारी रेलगाडी की मजेदार यात्रा।
07-ओरछा-किले में लाईट व साऊंड शो के यादगार पल 
08-ओरछा के प्राचीन दरवाजे व बेतवा का कंचना घाट 
09-ओरछा का चतुर्भुज मन्दिर व राजा राम मन्दिर
10- ओरछा का जहाँगीर महल मुगल व बुन्देल दोस्ती की निशानी
11- ओरछा राय प्रवीण महल व झांसी किले की ओर प्रस्थान
12- झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का झांसी का किला।
13- झांसी से दिल्ली आते समय प्लेटफ़ार्म पर जोरदार विवाद


उन दोनों ने कहा कि यहाँ मन्दिर देखने में कोई शुल्क नहीं लगता है लेकिन प्रवेश दवार के ठीक बहार एक संग्रहालय है जिसे देखने का शुल्क मात्र पाँच रुपया है। ठीक है एक टिकट दे दो। मैंने उन्हे दस रुपये दे दिये। उनके पास खुले पैसे नहीं थे। उन्होंने मुझे कहा कि खुले पैसे दे दो। मेरे पास जेब में खुले पैसे नहीं थे। बैग में जरुर बचे होंगे लेकिन बैग तो ऑटो में ही छोड आया था। मैंने कहा कोई बात नहीं आप खुले पैसे रहने दो। मैं चलने लगा तो उन्होंने मुझे रुकने को कहा। उन्होंने अपने सारे दराज खोज मारे जिसमॆं उन्हे पाँच रुपये चिल्लर मिल ही गये। उन्होंने मुझे खुले पैसे देने के बाद ही जाने दिया।
इस मन्दिर परिसर में रात्रि विश्राम हेतू धर्मशाला भी बनी हुई है। जिसमें साधारण कमरा मात्र 200 सौ रुपये किराया वाला है जबकि वातानूकुलित कमरे का शुल्क मात्र 500 सौ रुपये बताया गया। यह जगह भीड भाड से दूर है। रहने के लिये अति उत्तम स्थान है। अगर कभी सपरिवार यहाँ जाना हुआ तो इसी मन्दिर परिसर में ठहरा जायेगा। चलो आगे बढते है आज तो ठहरना नहीं है। यहाँ एक दीवार के पीछे कई मन्दिरों की चोटियाँ दिख रही है। मन्दिर में घुसने से पहले एक वर्दीधारी से मालूम किया कि यहाँ देखने लायक कितने मन्दिर है? उसने बताया कि यहाँ दो प्राचीन मन्दिर व एक नया मन्दिर है।
चलो शुरुआत सबसे पहले पूर्वी समूह में गिने जाने वाले नये मन्दिर को देखने से ही करते है। मन्दिर में अन्दर जाते ही अहसास हुआ कि यह मन्दिर काफ़ी नया है। इसमें जैन समुदाय से सम्बंधित मूर्तियाँ व उनके अन्य मुख्य मन्दिरों के बारे में जानकारी मिलती है। यहाँ भारत के अन्य जैन मन्दिर के बारे में जानकारी देने वाली फ़ोटो लगायी गयी है। जिससे भारत भर में फ़ैले जैन मन्दिरों के बारे में पता लग जाता है। मुख्य जैन मन्दिर बाहुबलि विद्यापीठ, महावीर जी, मांगी तुंगी गिरीराज जी, राजगीर जी, शिखर जी के बारे सचित्र बताया गया है।
इस मन्दिर में जैन समुदाय से सम्बंधित महापुरुषों की बडी-बडी शिल्प मूर्तियाँ स्थापित है। जैन समुदाय में त्याग व अहिंसा को सर्वोपरि माना गया है। जैन समुदाय में शीर्ष महात्मा तन पर कुछ भी धारण नहीं करते है। उन्हे ठन्ड हो गर्मी हो, कोई फ़र्क नहीं पडता है। मेरे जैसे सुविधा भुक्त भोगी लोग तो बिना कपडों के सभी सीजन में चिल्लाना शुरु कर देते है। इन महात्माओं की हिम्मत व जीवटता को नमन है। क्या हम कल्पना कर सकते है कि शरीर पर एक भी कपडा यहाँ तक की लंगोट धारण किये बिना हम अपनी गली में मोहल्ले में विचरण कर सकते है। इन जैन महात्माओ ने अपनी इन्द्रियों पर पूरी तरह काबू पा लिया होता है तभी तो यह सबसे अलग होते है।
यह मन्दिर तो देख लिया चलो अब आगे चलते है। इस मन्दिर के ठीक बराबर में पार्श्वनाथ मन्दिर बना है। उसके ठीक बगल में आदिनाथ मन्दिर है। यह दोनों आदिनाथ व पार्श्वनाथ जैना समुदाय में भगवान माने जाते है। मैंने दोनों मन्दिर देखे। यह दोनों मन्दिर खजुराहो के अन्य मन्दिरों की तरह हजार साल पुराने है। इनमें भी शानदार शिल्पकारी की गयी है। इन मन्दिरों में भी मुस्लिम आक्रमकारियों की तोडफ़ोड दिखायी दी। मन्दिर देखने के बाद बाहर आया। 

मुख्य दरवाजे के ठीक बगल में बने जैन संग्रहालय में जा घुसा। यहाँ पर शर्मा उपनाम वाले एक कर्मचारी मिले जिन्होंने बताया कि वह यहाँ पच्चीस सालों से कार्य कर रहे है। इस संग्रहालय में जैन समुदाय के तीर्थंकर को जन्म देने वाली महिलाओं को आने वाले स्वप्न की महत्वपूर्ण जानकारी हाथ लगी। संग्रहालय में कार्यरत कर्मचारी ने बताया कि जैन समुदाय के तीर्थंकर को जन्म देने वाली माता को सपने में 16 प्रकार के स्वप्न आने लगते थे। उन्ही के बारे में एक पत्थर पर शिल्पकार ने उकेरा हुआ है। संग्रहालय का निर्माण गोलाई में किया गया है। अपने मतलब का कार्य होते ही मैं वहाँ से बाहर चला आया। बाहर आते ही ऑटो में बैठा और बाकि बचे मन्दिरों को देखने चल दिया। अब सिर्फ़ दो मन्दिर बाकि है जो आमने सामने है। जिन्हे देखने के उपरांत खजुराहो को बाय-बाय कर दिया जायेगा।  (यात्रा जारी है।)
































3 टिप्‍पणियां:

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