शनिवार, 28 दिसंबर 2013

vashisht temple manali & hot spring मनाली का वशिष्ट मन्दिर व गर्म पानी का स्रोत

किन्नौर व लाहौल-स्पीति की बाइक यात्रा के सभी लेख के लिंक नीचे दिये है।
11- सतलुज व स्पीति के संगम (काजिंग) से नाको गाँव की झील तल
12- नाको गाँव की झील देखकर खतरनाक मलिंग नाला पार कर खरदांगपो तक
13- खरदांगपो से सुमडो (कौरिक बार्ड़र) के पास ममी वाले गियु गाँव तक (चीन की सीमा सिर्फ़ दो किमी) 
14- गियु में लामा की 500 वर्ष पुरानी ममी देखकर टाबो की मोनेस्ट्री तक
15- ताबो मोनेस्ट्री जो 1000 वर्ष पहले बनायी गयी थी।
16- ताबो से धनकर मोनेस्ट्री पहुँचने में कुदरत के एक से एक नजारे
17- धनकर गोम्पा (मठ) से काजा
18- की गोम्पा (मठ) व सड़क से जुड़ा दुनिया का सबसे ऊँचा किब्बर गाँव (अब नहीं रहा)
20- कुन्जुम दर्रे के पास (12 km) स्थित चन्द्रताल की बाइक व ट्रेकिंग यात्रा
21- चन्द्रताल मोड बातल से ग्रामफ़ू होकर रोहतांग दर्रे तक
22- रोहतांग दर्रे पर वेद व्यास कुन्ड़ जहां से व्यास नदी का आरम्भ होता है।
23- मनाली का वशिष्ट मन्दिर व गर्म पानी का स्रोत


KINNAUR, LAHUL SPITI, BIKE TRIP-23                                       SANDEEP PANWAR

मनाली में कई दर्शनीय स्थल है जिनमें वशिष्ट मन्दिर व हिडिम्बा देवी मन्दिर प्रमुख है। आज मनाली से मात्र 3 किमी दूर स्थित वशिष्ट मन्दिर के गर्म पानी में नहाने चलते है। हाइवे पर व्यास और मनालसू नदी का संगम देखने लायक है। मुख्य हाईवे से मात्र 2 किमी ऊपर उल्टे हाथ जाने पर एक सड़क मन्दिर के सामने जाकर समाप्त होती है। मन्दिर से आधा किमी पहले एक बोर्ड दिखायी दिया, जिसमें लिखा था कि वशिष्ट मन्दिर जाने वाले वाहन यहाँ पार्क करे। मन्दिर का कही अता-पता नहीं था। हमने एक स्थानीय बन्दे से पूछा कि मन्दिर की पार्किंग कहाँ है? उसने कहा कि मन्दिर के सामने ही बाइक की पार्किंग है। हम आधा किमी आगे मन्दिर तक चले गये। मन्दिर के ठीक पहले जंजीर ड़ालकर मार्ग अवरुद किया गया था। वहाँ खडे एक कर्मचारी से जंजीर हटाने को कहा तो उसने मना कर दिया कि यहाँ बाहरी वाहन अन्दर ले जाना मना है। राकेश बोला, जाट भाई आप जाओ, मैं नहीं जा रहा मन्दिर-वन्दिर।




राकेश को वही रुकने की बोल, मैं कैमरा लेकर मन्दिर की ओर चल दिया। राकेश बोला जाट भाई तौलिया व कपडे लेकर नहीं जाओगे? ना मैं नहाने नहीं जा रहा हूँ मैं सिर्फ़ मन्दिर के फ़ोटो लेने जा रहा हूँ। कम से कम एक लेख तो बन जायेगा। मन्दिर में मूर्ति पूजा मैं कभी करता ही नहीं हूँ। मैं राकेश को वही छोड़कर मन्दिर चला गया।  मुख्य मन्दिर के ठीक सामने एक अन्य मन्दिर बना है। जिसे श्रीराम जी का मन्दिर बताया जाता है। मैंने पहले यही मन्दिर देखा। कुछ लोग वहाँ पहले से ही फ़ोटो लेने में लगे पडे थे इसलिये मुझे फ़ोटो लेने में कोई हिचक नहीं हुई। मन्दिर के पुजारी रुपये ऐठने के चक्कर में मन्दिर में फ़ोटो लेने से रोकते है। वहाँ कोई पुजारी या उसका सेवक नहीं था। श्रीराम मन्दिर के कई फ़ोटो लिये। यहाँ से पहाड़ बहुत शानदार दिखायी दे रहा था।

इस मन्दिर के बाद मुख्य मन्दिर के फ़ोटो लेने पहुँच गया। चूंकि दोनों मन्दिर आमने सामने है। अत: जूते एक बार ही निकालने पड़ते है। मुख्य मन्दिर में प्रवेश करते ही मैंने वहाँ बैठे सेवक से कहा कि अन्दर फ़ोटो पर कहाँ तक छूट है? उसने कहा कि बस मुख्य मूर्ति की फ़ोटो मत लेना। ठीक है। समझ गया। मैंने मुख्य मन्दिर के कई फ़ोटो लिये। गर्म पानी का कुन्ड़ मन्दिर परिसर के अन्दर ही है। जब हमें स्नान ही नहीं करना था तो कुन्ड़ भी नहीं गये और वहाँ से बाहर आ गया। वैसे भी मन्दिर में इससे ज्यादा अपुन को कुछ काम होता ही कहाँ है? हर मन्दिर के पीछे एक कहानी बतायी जाती है वैसे मैं कहानी-वहानी बताता नहीं हूँ लेकिन इस लेख में लिखने को ज्यादा कुछ नहीं है तो चलो लेख भी लम्बा हो जायेगा और इस मन्दिर की कहानी भी आपको पता लग जायेगी।

यह मन्दिर भगवान राम का मन्दिर है। यहाँ ऋषि वशिष्ट ने तपस्या की थी। इस मन्दिर में गर्म पानी का श्रोत है जिस कारण ठन्ड़ में भी यहाँ नहाने वाले आते-रहते है। यहाँ के गर्म पानी से नहाने पर शरीर के चर्म रोग वाली बीमारियाँ दूर भागती है। मुफ़्त में यहाँ स्नान नहीं करने देते। यहाँ नहाने का पैसा वसूल किया जाता है। अब चलते है कहानी पर- जब अयोध्या के राजा श्री राम (वैसे इन्हे भगवान बना दिया गया है। चिन्ता ना करो, अम्बेड़कर व महात्मा गाँधी भी कुछ सालों बाद भगवान बनने जा रहे है?) ने रावण को मार दिया तो उन पर ब्रह्म हत्या का पाप लग चुका था। अयोध्या वापिस आने पर इस पाप से छुटकारा पाने हेतू श्रीराम जी को अश्वमेध यज्ञ करना पड़ा।

यज्ञ शुरु होते समय सभी ऋषि मुनी उस्पस्थित थे। लेकिन श्रीराम के राजपुरोहित गुरु वशिष्ट वहाँ नहीं थे। राजपुरोहित की खोज की गयी तो पता लगा कि गुरु जी तो हिमालय में तपस्या करने गये हुए है। श्रंगी ऋषि लक्ष्मण को साथ लेकर वशिष्ट गुरु की खोज में चल दिये। ठन्ड के दिनों में गुरु को गर्म पानी से स्नान कराने के लिये लच्छु ने अग्नि बाण मारा, जिससे यहाँ गर्म पानी निकलने लगा। (कमाल का बाण था जो आज तक गर्म पानी निकल रहा है।) अगर खोज की जाये तो हिमालय में कम से कम 10-12 स्थलों पर गर्म पानी के श्रोत मिल जायेंगे। वहाँ पर गर्म पानी इस बाण के कमाल से ही गर्म तो नहीं है खोज का विषय जरुर है। गुरु ने भी घोषणा कर दी कि अब जो भी यहाँ स्नान करेगा। उसके चर्म रोग दूर हो जायेंगे। इसका क्या अर्थ निकाला जाये कि गुरु को चर्म रोग रहा होगा? (दुनिया के धर्म में इस प्रकार के लोचे है। अगर किसी में नहीं है बता देना। लोचा मैं बता दूंगा?) गुरु मिले गये थे अब गुरु को अयोध्या जाने से कौन रोक सकता था? गुरु अयोध्या गये। सकुशल यज्ञ सम्पन्न कराया।

अब कुछ प्रवचन मन्दिर के बारे में हो जाये। यह मन्दिर लोक शैली में बनाया गया है। मन्दिर में लगायी गयी लकडियों में शानदार नक्कासी की गयी है। मन्दिर के अन्दर गुरु की आदमकद आकार पाषाण की बड़ी मूर्ति स्थापित है। मैं पहले जिस मन्दिर में गया था वह राम जी मन्दिर बताया गया। श्रीराम के वंश में राजा परीक्षित का लड़का जनमेजय राजा बना तो उसने भारत में काफ़ी यात्रा की थी। यह मन्दिर उसी ने अपने कुल देवता श्रीराम की याद में 4000 साल पहले बनवाया था।

वशिष्ट गाँव के बारे में कहा जाता है कि इस गाँव के नजदीक छोइड़ नामक झरना है, उस झरने में लोग अपने बच्चों को मुन्ड़न कराने लाते है। (अरे तिरुपति चले जाओ, मुफ़्त में मुन्ड़न होता है।) यहाँ मुन्डन कराये बच्चों के बारे में कहते है कि उन्हे भूत प्रेत के ड़र से मुक्ति मिल जाती है। इस गाँव में बसन्त ऋतु आगमन पर विरशु मेला लगता है। यहाँ पर इस मेले में “चरासे तरासे” नाम का लोक नृत्य देखने लायक होता है। यह नृत्य महिलाएँ (महिलाओं के चक्कर में मत जाना) करती है जो देखने लायक होता है। इतनी जानकारी बहुत है। अच्छा तो अब इस गाँव से वापिस चलते है।

वशिष्ट मन्दिर से वापस चल दिये। ढलान थी इस कारण बाइक स्टार्ट करने की आवश्यकता नहीं थी। राकेश और मेरा मूड़ खराब हो चुका था। हमने तुरन्त मनाली छोड़ने का फ़ैसला कर लिया। बाइक हाइवे पर आते ही कुल्लू की ओर दौड़ा दी गयी। मनाली में देखने लायक हिडिम्बा देवी का मन्दिर भी है। जिसे मैंने अभी तक नहीं देखा है। इसके अलावा सोलंग वैली/नाला भी देखने लायक स्थल है। इन दोनों जगहों के नजदीक से कई बार आना-जाना हो चुका है लेकिन अभी वहाँ जा नहीं पाया हूँ।

यह यात्रा अपने अन्तिम चरण में प्रवेश कर चुकी है। अब इस यात्रा का केवल एक लेख शेष बचा है। मैंने सोचा हुआ था कि बिजली महादेव चला जाये। उसके बाद शिकारी देवी तक बाइक पर घूम आया जाये। दिल्ली से चलते समय राकेश के साथ दोनों स्थानों पर चलना तय हुआ था। लेकिन राकेश ने कहा जाट भाई मुझे कल दिल्ली पहुँचना बहुत जरुरी है। अगर मैं कल दिल्ली नहीं जा पाया तो बहुत नुक्सान हो जायेगा।

काम-धन्धे वाले बन्दों के साथ यात्रा करना भी समस्या पैदा कर देता है। अच्छा भाई बाइक तुम्ही ले जाओ। मैं बस से बिजली महादेव व शिकारी देवी चला जाऊँगा। राकेश बोला जाट भाई मैंने आपको बाइक के लिये मना नहीं किया है। चलो कुल्लू तक बाइक पर साथ चलते है। वहाँ से तुम बस में बैठ जाना। मैं बिजली महादेव चला जाऊँगा।  (यात्रा जारी है।)   










3 टिप्‍पणियां:

SACHIN TYAGI ने कहा…

वशिष्ट मन्दिर से दिखते ऊचे ऊचे प्रर्वत बढिया लगते है.राकेश व आप का मुड खराब हो गया इसलिए हमारा मुड भी खराब होना लाजमी है क्योकी हमे कुछ पढने व कुछ चित्रो से वंचित होना पडा है

Vaanbhatt ने कहा…

अति सुंदर...

दर्शन कौर धनोय ने कहा…

हिडम्बा मंदिर मैंने देखा है ---वैसे यात्रा ख़तम होने से भी मूढ़ ख़राब होता है ---

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