सोमवार, 26 दिसंबर 2011

SAMPLA BLOGGER MEET साँपला ब्लॉगर मिलन 1


यह साँपला का रेलवे स्टेशन है।

साँप ला, साँप ला, साँप ला, साँप ला, साँप ला, "साँपला" नाम ऐसा कि जैसे कोई साँप ला रहा हो यहाँ आने से पहले मैंने भी यही सोचा था कि यहाँ जाने के लिये साँप लेकर जाना होगा लेकिन ऐसा कुछ नहीं था हमारे घर लोनी से पुरानी दिल्ली से होती ट्रेन सीधी साँपला तक जाती है बल्कि उससे आगे रोहतक तक भी जाती है। मुझे तो साँपला में ब्लॉगर मिलन में जाना था अत: अपुन तो साँपला के रेलवे स्टेशन पर उतर गये, यहाँ स्टेशन से बाहर निकास वाले द्धार पर अन्तर सोहिल जी व्यंजना शुक्ला जी को लेने के लिये आये हुए थे। व्यंजना जी लखनऊ से आयी थी। मैंने दोनों को देख लिया था लेकिन अन्तर सोहिल जी ने मुझे/मेरी ओर नहीं देखा। मैं उन दोनों के पीछे जाकर खडा हो गया। अब देखो कमाल कि जैसे ही ये दोनों वहाँ से चलने लगे तो ये मेरे पीछे से घूमकर निकल चले मैंने पीछे से अन्तर सोहिल जी की स्वेटर पकड ली लेकिन मेरा चेहरा उनकी तरफ़ नहीं था। जैसे ही सोहिल जी ने मेरा चेहरा देखा तो उनके चेहरे की खुशी शब्दों में ब्यान नहीं की जा सकती है, हम दोनों खुशी से एक-दूसरे के गले से लिपट गये। बल्कि सोहिल जी जो कि खुद 60-65 किलो वजन के ही है मुझे 77-78 किलो वजन को गले लिपटे-लिपटे ही उठा लिया था।
यह साँपला की पंजाबी धर्मशाला है। जो अन्दर से बहुत ही शानदार बनी हुई है।

सबसे पहला सवाल सोहिल जी का यही था कि और कौन-कौन आया है, अब क्या कहता सच बोलना पडा कि कोई मेरे साथ नहीं आया पहले मेरे साथ नीरज जाट, केवल राम व संजय अनेजा जी सभी एक साथ ही आने वाले थे लेकिन सभी अलग-अलग आये बल्कि नीरज जाट को तो सर्दी ने ऐसा सताया कि घर पर ही बिस्तर में बैठ कर समय काटना पडा। स्टेशन से मात्र सौ मीटर की दूरी पर ही ब्लॉगर मिलन स्थल था। यहाँ पर सबसे पहले पहुँचने वाले विजेता अपने छोटे भाई केवल राम जी बने, पहला स्थान तो अपना आना था लेकिन ट्रेन के चक्कर में दूसरे स्थान से संतोष करना पडा, चलो कोई बात नहीं केवल राम जी ने मेरा स्वागत किया, तभी संजय भास्कर जी का भी फ़ोन आया कि मैं चौराहे पर खडा हूँ। केवल जी ने संजय भाई को भी मार्ग के बारे में समझाया। कुछ देर बाद संजय भाई भी सांपला में पधार चुके थे। पौने बारह बजे का समय हुआ था। 
संजय भास्कर, जाट देवता, राजेश सहरावत,
संजय भास्कर, केवल राम, राजेश सहरावत,
अन्तर सोहिल(अमित गुप्ता), अतुल कुमार, कोट पैंट वाले बंधु का नाम याद नहीं आ रहा है।
इस फ़ोटो में जिन्हें पहचान सकते हो पहचान लीजिए।
भाटिया जी अपनी जीवन संगिनी के साथ सब के मध्य में।
यह फ़ोटो केवल राम जी ने लिया है।
संजय अनेजा जी, पूर्विया जी, बाबा जी बक-बक वाले, आशु भाई।

थोडी देर बाद राजेश सहरावत जी भी आ पहुँचे, राजेश भाई दिल्ली के बवाना के पास दरियापुर गाँव के रहने वाले है। राजेश भाई से गन्ने लाने का अनुरोध बहुत पहले ही कर दिया था अत: राजेश भाई पूरे 60-70 किलो गन्ने साथ लाये थे, साथ ही 5 किलो रेवडी भी नीरज जाट जी के खाने के लिये लाये थे लेकिन रेवडी वापस ले जानी पडी थी। एक किलो मैंने अपने लिये ले ली थी। लगभग 12:30 बजे अतुल भाई जो कि सोनीपत में रहते है अभी स्नातक में शिक्षा ग्रहण कर रहे है, सब के बीच पहुँच गये थे। यहाँ यह बात बतानी आवश्यक है कि अतुल व राजेश जी ब्लॉग लिखते नहीं है सिर्फ़ पढते है। धीरे-धीरे ब्लॉगर मिलन वाले साथियों की संख्या बढती जा रही थी। सब अपनी-अपनी चर्चा में व्यस्त थे। गन्नों पर हमला शुरु हो गया था। गन्ना प्रतियोगिता में जाट देवता के आगे कोई जीत नहीं सकता था और यहाँ भी कोई जीत नहीं पाया, एक-आध स्टाईल वाले बंधु को छोडकर लगभग सभी ने गन्ना प्रतियोगिता में भाग लिया था। मुझे यहाँ पर सभी से मिलकर बहुत खुशी हुई, बडी मुश्किल से ही ऐसे मौके मिल पाते है जब अन्तर्जाल के साथी आमने-सामने हो पाते है। सभी के नाम तो आप सब जानते ही है फ़ोटो देख कर अंदाजा लगाईये कि कौन-कौन है।   



ब्लॉगर गन्ने का स्वाद लेते हुए, गन्ना प्रतियोगिया का फ़ोटो,
अतुल एक मासूम चेहरा व संदीप एक खूंखार चेहरा।
सामने गन्ने देख बन्दर भी लड पडे थे।
जब गन्ना दिया तो इन्हें चैन आया था।
बहुत गन्ने बाकि थे मानव हो या वानर सब ने जी भर कर स्वाद लिया था।


आगे अभी बहुत कुछ बाकि है वो भी दिखाना है, देखना चाहते हो तो यहाँ क्लिक करे


19 टिप्‍पणियां:

  1. na jaat bhulega na wo ganne wale, rajesh ji ka thanks ganne ke liye, or overall anatr sohil ko to bahut dhanyawaad..


    fotugraphy bahut achchhi kar lete hain...

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  2. बहुत सी यादें जुडी रहेंगी सापला की सांपला के ब्लॉगर मिलन बहुत ही आनद दायक पल थे
    सम्मेलन को सफल बनाने वाले सभी ब्लॉगर बंधुओं को शुभकामनाएं
    और जहाँ तक गन्ने की बात है करीब दो सालो बाद गन्ना खाया
    मन तृप्त हो गया जी बढ़िया रिपोर्ट .... तैयार की है आपने संदीप जी (जाट देवता )

    जय हो जाट देवता की

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  3. भाई बंदरों से पूछ लेते, कहीं वोह भी तो ब्लॉग मिलन में नहीं पधारे थे और आपने गन्ने से विदा कर दिया....
    रिपोर्ट बहुत सुंदर.... हमेशा की तरह....

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  4. काश ! सरदी न होती !

    शायद ,तब हम भी होते !

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  5. जाटदेवता का कहीं कमेंट पढ़ा था कि वो आदमी ही क्या जो जबान से फ़िर जाये, वही कमेंट खींच ले गया और बाकी काम बाबाजी, मिश्राजी और आशु के साथ ने किया जो ढोकर ले गये और लाये भी। बहुत मजबूरी न रही होती तो रात भी वहीं बिताते।

    सहरावत भाई और अतुल जैसों का ज्यादा आभार मानता हूँ जो खुद ब्लॉग न लिखते हुये भी इतने शौक से हम लोगों से मिलने आये।
    और भाई, गन्ने नहीं खाये तो और कोई वजह नहीं थी, शुरुआत मीठे से हो जाये तो फ़िर अपने से रुकया नहीं जाता:)
    आयोजकों का आभार अमित के जरिये व्यक्त कर ही दिया। ओवरॉल, रिपोर्टिंग सहित सब आनंददायक रहा।

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  6. सुंदर सार्थक प्रेरणादाई सटीक आलेख....

    नई पोस्ट--"काव्यान्जलि"--"बेटी और पेड़"--में click करे.

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  7. वाह जी… सभी मित्रों और धुरंधर ब्लॉगरों की तस्वीरें देखकर मजा आ गया… मैं उपस्थित न हो सका इसका भी मलाल रहेगा…
    सभी ब्लॉगर्स को हार्दिक शुभकामनाएं…

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  8. वाह! जी वाह! शानदार प्रस्तुति.

    जाट देवता जी से मिलकर हार्दिक प्रसन्नता हुई.

    ब्लोगर मिलन बहुत ही सफल रहा.

    अगली कडी का इंतजार है.

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  9. काम समय उपस्थित रहा मगर जितनी देर रहा आनंद आ गया...फ़ोटोग्राफ़ी बहुत सुन्दर जाट देवता की

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  10. वाह विस्तृत रिपोर्ट के लिए बहुत बहुत शुक्रिया संदीप भाई । सांपला का वो एक दिन तो अब मन में बस गया है

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  11. हम तो बहुत मीठी यादेंलेकर आये हैं सांपला से संदीप जी ……सच यादो को सहेज लिया है।

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  12. अच्छी रिपोर्ट... सुंदर चित्रावली...
    सादर बधाई...

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  13. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच-741:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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