शनिवार, 10 दिसंबर 2011

BHIMTAL भीमताल, भाग 1

अब तक सुनते आये थे कि तालों में ताल नैनीताल, भीमताल, नौकुचियाताल, सातताल जैसी कई ताले है जो कि नैनीताल के आसपास फ़ैली हुई है। इन सब तालों को देखने की इच्छा कई सालों से मन में हिलोरे मार रही थी। वैसे तो मैं भारत में बहुत सी जगह घुमक्कडी कर चुका हूँ लेकिन अभी तक मेरा चक्कर उतराखण्ड के कुमायूँ क्षेत्र में नहीं हुआ था। बनारस से आते ही सोच लिया था कि जैसे भी हो अबकी बार तो नैनीताल का एक चक्कर जरुर लगाना ही है। अपने एक ब्लॉगर बंधु जो अन्तर सोहिल के नाम से लिखते है। एक बार मैंने उन्हें नैनीताल के घूमने की इच्छा बतायी तो उन्होंने कहा कि अगर आप भीमताल आदि देखना चाहते हो तो मैं भी साथ चलूँगा। अन्तर सोहिल जी जो कि ओशो के आश्रम में जाकर वहाँ पर उनकी शिक्षा का आनन्द उठाते रहते है। उन्होंने बताया कि भीमताल में एक ओशो आश्रम है जिसमें जुलाई की दिनांक 15.06.2011 से तीन दिन का कैम्प लगने जा रहा है। मैंने सोचा कि अच्छा मौका है दो जानकारी एक साथ देखने को मिलेगी। पहली प्राथमिकता तो वहाँ घूमने की ही थी, दूसरी ओशो के आश्रम के बारे में जानने का मौका था कि आखिर ओशो आश्रम में क्या होता है लगे हाथ ये भी समझने का मौका मिलेगा। पहली बार तो हम दोनों का ही जाने का कार्यक्रम बना हुआ था। जिस कारण मैं तो अपनी नीली परी पर जाने की खुशी में तैयार ही था। लेकिन जिस दिन हमें जाना था उससे एक दिन पहले अन्तर सोहिल जी का फ़ोन आया उन्होंने कहा जाटदेवता जी एक दोस्त और साथ हो लिया है अब बाइक पर कैसे जायेंगे। बाइक एक; जाने वाले तीन मामला वाकई परेशानी करने वाला था। आखिरकार इसका समाधान निकला कि बाइक से ना जाकर बस से जाया जाये। तब तय हुआ कि रात के ठीक 9 बजे आनन्द विहार बस अडडे पर मिलते है वहाँ से रात की बस में बैठकर भीमताल चला जाये।
भीमताल के थाने के पास लिया गया फ़ोटो है।
ये नक्शा भी जरुरी था।
यहाँ से भुट्टा लेकर खाया गया था।

अपुन तो हमेशा से समय के पाबन्द है ही लेकिन अन्तर सोहिल जी भी समय के पाबन्द निकले और तय समय पर हम तीनों आनन्द विहार के बस अडडे पर हाजिर हो गये थे। वहाँ पहुँचने के बाद पता किया तो मालूम हुआ कि रात को 11 बजे की वातानुकूलित बस है जो हमें काठगोदाम तक ले जायेगी। साधारण बसे तो हर आधे घन्टे बाद जा रही थी। तीसरे साथी जो हमारे साथ जा रहे थे वो तो पहले से ही ओशो वाली वेशभूषा में आये थे मैंने उन्हे देखकर पूछा कि ये कौन महाराज जी पकड लिये तो अन्तर सोहिल ने कहा कि ये पहुँचे हुए महाराज है। अब मैं ठहरा कुछ अलग किस्म का प्राणी, ये महाराज कोई सी भी किस्म के हो इससे अपने को क्या फ़र्क पडने वाला था। हम अभी वहाँ टिकट की लाईन में खडे हुए ही थे कि तभी वहाँ पर निजी बस वालों के दलाल चक्कर लगाने लगे। दलाल आवाज लगा रहे थे कि "हल्द्धानी नैनीताल-नैनीताल मात्र 450 रु"। अपने पहुँचे हुए महाराज तो उस दलाल के साथ ही हो लिये कि चल भाई अपनी बस दिखा अगर ठीक हुई तो उसमें ही चलेंगें। बस वाला हमें आनन्द विहार बस अडडे से बाहर ले गया। वहाँ सडक पार करने पर निजी बस वालों की बस खडी हुई थी। जैसे ही हम बस में घुसे तो लगा जैसे स्वर्ग में आ गये हो। गलत मत समझना वहाँ छोरी-छारी नहीं थी बल्कि बस में A.C. चल रहा था जिससे वहाँ का तापमान 20 डिग्री के आसपास ही होगा। बाहर उस समय बहुत ही गर्मी लग रही थी। अपने पहुँचे हुए महाराज तो बस में डेरा जमा कर ही बैठ गये थे। बस वाले से बस के चलने के समय के बारे में पता किया उसने बताया कि बस ठीक साढे 10 बजे चल देगी। लेकिन जब 11 बजे तक भी बस नहीं चली तो अपना दिमाग गर्म होने लगा। थोडा सा शुक्र ये था कि बस में हमारे आने से पहले ही A.C. चल रहा था। आखिरकार वहाँ बैठी हुई अन्य सवारियों का धैर्य भी जवाब देने लगा और उन्होंने बस वाले के साथ लडना शुरु कर दिया। इस लडाई में हमें भी कूदना ही था परेशान तो हम तीनों भी हो गये थे, बस वाले से सबने अपने-अपने रु वापिस माँगने शुरु कर दिये । बस वाले को लगा कि अब शायद रु वापिस देने ही पडॆंगे तो उसने कहा कि ठीक 11:30 पर बस चल पडेगी। वैसे बस फ़िर भी चली 12 बजे के आसपास, लेकिन हमारी परेशानी यहाँ ही समाप्त नहीं हुई, यहाँ से बस ले जाकर पैट्रोल पम्प पर खडी कर दी, बस अभी पूरी तरह फ़ुल नहीं हुई थी ये निजी बस वाले कई जगह के एजेंटो से सम्पर्क में रहते है। पेट्रोल पम्प पर भी 15-20 मिनट बर्बाद कर ही दिये। 
चलो जी ओशो आश्रम तलाश करते है।
भीमताल की छोटी सी झलक आगे अच्छी तरह दर्शन कराये जायेंगे।

किसी तरह वहाँ से चले तो चले तो वहाँ की अन्य सडको से होता हुआ बस वाला फ़िर से उसी जगह ले आया जहाँ से बस शुरुआत में चली थी। लेकिन यहाँ आते ही बस वाले ने सवारियों के बोलने से पहले ही कह दिया कि कोई नाराज ना होना अभी 7 सीट खाली है यहाँ से चार सवारी और लेनी है बस चारों सवारियों के बैठते ही बस चल पडेगी। ये भी ऊपर वाले का शुक्र रहा कि चारों सवारी पहले से ही मौजूद थी। मुल्लाओं में एक कहावत है कि जाट को मरा हुआ तब मानना चाहिए जब उसकी तेरहवीं हो जाये। ठीक उसी तरह हम भी ये मान कर बैठे थे कि जब तक बस हिण्डन पर बने पुल को पार नहीं कर लेती है तब तक हम भी नहीं मान रहे थे कि बस चल पडी है। जब बस ने सचमुच में हिण्डन नदी पार कर ली तो जान में जान आयी कि चलो अब तो चल ही दिये है। बस फ़ुल वातानुकूलित थी, साथ में सभी सीटे भी पीछे तक फ़ैलने वाली थी, जिस कारण रात में सोते हुए चले गये थे। ये मत कहना कि बढिया नींद आयी होगी, किसी तरह कमर तो सीधी सी हो गयी थी, पैर को तो उसी मुडी-तुडी हालत में ही रात भर रहना पडा था। सुबह अपनी आदत अनुसार 5 बजे आँख खुल गयी थी, बाहर देखा तो मालूम हुआ कि अभी तो मुरादाबाद भी नहीं आया है। किसी तरह 6 बजे मुरादाबाद में प्रवेश हुआ। यहाँ से आगे बस चलती रही और रुद्रपुर जाने पर बस से सवारियाँ उतरनी शुरु हो गयी थी। यहाँ 4-5 सवारी उतर जाने के बाद बस फ़िर अपनी मंजिल की ओर चल पडी थी। ठीक साढे आठ बजे हमारी बस काठगोदाम पहुँच गयी थी।बस तो नैनीताल जा रही थी लेकिन हमें भीमताल जाना था इसलिये हम तीनों भी काठगोदाम के स्टेशन के सामने ही बस से उतर गये। हमें बस से उतरे 3-4 मिनट ही हुए थे कि एक आल्टो कार वाले ने भीमताल-भीमताल की आवाज लगायी। अन्तर सोहिल ने उस कार वाले से बात की तो उसने काठगोदाम से भीमताल तक 22 किमी जाने के प्रति सवारी 50 रु किराया बताया। चूँकि मैं इस जगह से आगे पहली बार जा रहा था अत: मैं आगे सीट पर बैठना चाहता था लेकिन आगे वाली सीट पर तो पहुँचे हुए महाराज डेरा जमा चुके थे। कार पहाडों के नागिन जैसे टेढे-मेढे बलखाते मार्गों पर मस्त चाल से चली जा रही थी। कि एक मोड पर हमें भुट्टा भूनने वाला नजर आया। उसे देखते ही कार रुकवायी। यहाँ से एक-एक भुट्टा खाने के बाद आगे बढे।

ये आश्रम जाने का पैदल मार्ग है।

आश्रम पहुँच कर मस्ती हो रही है।

लगभग 9:30 बजे सडक के किनारे एक बडी सी झील नजर आयी। पहले तो सोचा कि हो सकता है बिजली बनाने के लिये नदी का पानी रोककर बाँध बनाया हुआ होगा, जैसे कि उतरकाशी से गंगौत्री जाते समय मनेरी में आता है। जब कार चालक से पूछा तो उसने कहा कि ये भीमताल है, भीमताल सुनते ही मैंने अपनी खोपडी कार से बाहर निकल ली थी ताकि इस भीमताल का जी भर कर अवलोकन कर सकूँ। भीमताल की आबादी शुरु होते ही भीमताल के किनारे पुलिस थाना आता है उसके पास ही कार वाले ने हमें उतार दिया था। उसने बताया कि उल्टे हाथ की ओर पहाड पर चढ जाना। आप लोग सीधे ओशो आश्रम पहुँच जाओगे। हमें सामने ही एक पगडंडी नजर आयी जिस पर चढते गये, लेकिन कुछ दूर जाने पर मार्ग ही नजर नहीं आया तो हम वापिस सडक पर लौट आये। सडक पर आने के बाद एक बन्दे से ओशो आश्रम के बारे में पता किया तो उसने कहा कि मैं वही जा रहा हूँ लेकिन मैं बाइक पर हूँ आप पैदल हो, मुझसे पहले पहुँच जाओगे। उसने थोडा सा आगे चलकर एक पगडंडी दिखायी जो सीधी घने जंगलों के बीच से होते हुए ओशो आश्रम तक जा रही थी। जैसे ही ओशो आश्रम पहुँचे तो देखा कि वहाँ तो पहले से ही महरुम रंग के बडे-बडॆ गाऊन पहने हुए लोग मौजूद है। ये गाऊन मैंने पहली बार देखे थे, ये मुझे औरतों द्धारा घर में पहनी जाने वाली मैक्सी जैसे लग रहे थे। आश्रम में हमारा स्वागत वहाँ के स्वामी (ओशो आश्रम के संचालक को स्वामी कहकर पुकारा जाता है)  
आश्रम के मार्ग में प्यारे-प्यारे फ़ूल है।
सामने जो घर दिखाई दे रहा है, उसमें कोई मिल गया फ़िल्म की शूटिंग हुई थी।


यह अन्तर सोहिल के दोस्त वेद सिंह है।
यह अन्तर सोहिल है। आप सब जानते ही हो।
अब नहीं बताऊँगा कि यह कौन है?

आगे अभी बहुत कुछ बाकि है.........  आगे पढने के लिये यहाँ क्लिक करे। 


भीमताल-सातताल-नौकुचियाताल-नैनीताल की यात्रा के सभी लिंक नीचे दिये गये है।
भाग-07-सातताल झील के साथ मस्त कदम ताल।
भाग-08-नैनीताल का स्नो व्यू पॉइन्ट।
भाग-09-नैनीताल की सबसे ऊँची चाइना पीक/नैना पीक की ट्रेकिंग।
भाग-10-नैनीताल से आगे किलबरी का घना जंगल।
भाग-11-नैनीताल झील में नाव की सवारी।
भाग-12-नैनीताल से दिल्ली तक टैम्पो-ट्रेन यात्रा विवरण।
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ताल ही ताल।

23 टिप्‍पणियां:

ब्लॉ.ललित शर्मा ने कहा…

@ अब नहीं बताऊंगा कि कौन है यह?

इब बता भी दे भाई, यो छोरा कोन सै ?

राम राम

डॉ टी एस दराल ने कहा…

भीमताल की वादियों के और सुन्दर फोटुओं का इंतजार रहेगा ।

Vidhan Chandra ने कहा…

बाकि चीज तो पता नहीं जाट साब , लेकिन ओशो दर्शन लाजवाब है !!
एक उदहारण,"मन पर फैला सेक्‍स तुम्‍हें कभी तृप्‍त नहीं कर सकता। आज पूरी पृथ्‍वी पर केवल मनुष्‍य ही ऐसा प्राणी है जो चौबीस घंटे सेक्‍स के बारे में सोचता है। इसका करण आपने कभी जानना चाहा। सेक्‍स शरीर की जरूरत है मन को सेक्‍स की जरूरत नहीं है। पर हम मन से विक्रीत हो गये है। वह प्रकृतिक नहीं हो विपरीत हो गया। आप इस का प्रयोग कर के कभी देखना। शरीर को मन पर उठने के बाद। पूरे शरीर पर चढ़ने दे। उसे देखते रहे। जीतना आप के पास होश होगा उस चढ़ने दे। रोके भी नहीं। अब ये आप पर निर्भर करता आप के उसे कितनी दूर तक ले जा सकते है। जितनी दूर तक आप उसे ले जायेंगे आनंद उतना ही गहरा होगा। और तृप्‍ति दाई। शायद महीनों फिर आप को उसमें डूबने की जरूरत ही न हो। पर हम उथले ही रह जाते है। और डूब जाते है किनारे पर ही होश है हमारे पास। इसे शरीर पर किस गहराई तक ले जा सकते है। यहीं है कीमिया। देखा आपने जानवरों को उन्‍हें सालों जरूरत नहीं होती। क्‍योंकि वह शरीर पर जीते है।"
लेकिन कुछ इन बातों को न समझ पाने के कारण ओशो दर्शन को गाली देते हैं !!

फकीरा ने कहा…

भाई वाह ओशो के आश्रम मैं मस्त रहा होगा एक्सपिरेंस

Maheshwari kaneri ने कहा…

सुन्दर यात्रा रोचक यात्रा..शुभकामनाएँ..

मनोज कुमार ने कहा…

सुंदर पोस्ट।

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत सुन्दर रोचक यात्रा| धन्यवाद|

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सुन्दर प्यारे रास्ते।

निरामिष ने कहा…

रोचक यात्रा वृतांत!! आपका सफर सदैव ही सुखद रहे

शानदार चित्र संयोजन है!!

प्रेम सरोवर ने कहा…

इस पोस्ट के लिए धन्यवाद । मरे नए पोस्ट :साहिर लुधियानवी" पर आपका इंतजार रहेगा ।

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) ने कहा…

ये हरियाली और ये रास्ता.....मनमोहक पोस्ट.

यादें....ashok saluja . ने कहा…

जाट भाई राम-राम .....!
बस वाले की कथा शत प्रतिशत सही है ,,मैं भी मुक्तभोगी हूँ....ये रात १२ बजे से पहले कभी नही चलेंगे ...
खैर आप की यात्रा सुखद हो ! अगली पोस्ट का इंतज़ार रहेगा |
शुभकामनाएँ !

veerubhai ने कहा…

अच्छी पोस्ट अच्छा रास्ता अच्छा वृत्तांत किस्सा गोई .आभार सब कुछ यूं लुटाने के लिए .आपकी टिप्पणियाँ न जाने कब से स्पेम में जा रहीं थीं आज रिलीज़ हुईं हैं .शुक्रिया .

हास्य-व्यंग्य का रंग गोपाल तिवारी के संग ने कहा…

Aapki Rachnaon ke madhyam se hum log bhi aapke sath saphar karte hain. badhiya post.

मदन शर्मा ने कहा…

रोचक यात्रा वृतांत!! आपका सफर सदैव ही सुखद रहे
.शुभकामनाएँ!

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

हमारे यहां वे बाबा बाज़ी भी बड़े काम की चीज़ है. सस्ते में घुमाई तो हो ही जाती है साथी ही पुण्य भी कमा लिया जाता है

vidya ने कहा…

सुन्दर वर्णन....आँखों के आगे पूरा खाका खिच गया..
संयोग से अभी शिवानी जी की कालिंदी भी पढ़ी...
सो पहाड़ों में मन अटका हुआ है अब तक..

DeViL on WheeLs... ने कहा…

Sandeep bhai... ati uttam... kafi maza aaya padh kar, lagta hai kafi maza aaya hoga bas wali kahani mein. Shukra hai bus wale ne agle din pahuncha diya :D ...

-- DeViL on WheeLs...

"जाटदेवता" संदीप पवाँर ने कहा…

दराल साहब भीमताल के फ़ोटो एक-दो पोस्ट वहाँ ओशो के कैम्प के बारे में दिखाने के बाद देख लेना।

विधान भाई आपके कहने के बाद मैंने आज जो पोस्ट लगायी है वो पूरी तरह ओशो के प्रवचन जो सेक्स पर ही है।

Vidhan Chandra ने कहा…

@संदीप जी धन्यवाद !!

Mukesh Bhalse ने कहा…

संदीप भाई,
पहुंचे हुए महात्मा जी का नाम और फोटो नहीं दिखाया?

Mukesh Bhalse ने कहा…

संदीप भाई,
पहुंचे हुए महात्मा जी का नाम और फोटो नहीं दिखाया?

दर्शन कौर 'दर्शी' ने कहा…

bahut badhiya .....ja rahe ho .

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