शुक्रवार, 24 नवंबर 2017

How to make blog and blog post? ब्लॉग कैसे बनाये और लेख कैसे लगाये?


आज के लेख में आपको फोटो व लेखन के माध्यम से ब्लॉग बनाना व पोस्ट तैयार करना सिखाया जा रहा है। इस पोस्ट का विचार इसलिये आया क्योंकि महीने में दो-तीन भाई बन्धु यह पूछने के लिये फोन लगाते है कि संदीप जी ब्लॉग कैसे बनाया जाता है? ब्लॉग बनाने के बाद अगला कदम लेख तैयार कर उसे पब्लिश करने का भी होता है। खाली ब्लॉग बनाकर तो कुछ नहीं होने वाला है। ब्लॉग पर कुछ न कुछ तो लिखना ही पढेगा। वैसे तो महीने में कम से कम एक लेख लिख देना चाहिए। यदि आपके पास ज्यादा समय हो प्रतिदिन या साप्ताहिक लेख भी लिख सकते हो। जैसी आपकी हिम्मत व मेहनत।
1.     How to make blog? & 2. How to make blog post? ब्लॉग कैसे बनाये व ब्लॉग पर लेख कैसे तैयार करे?
सबसे पहले बात आती है कि BLOG की शुरुआत कैसे हो? यहाँ आपको साधारण शब्दों में समझाया जा रहा है कि सबसे पहले क्या करना है? पहला काम यह है कि आप अपनी मेल आईडी को अपने लैपटॉप या कम्पयूटर में लॉग इन कर ले। इसके बाद किसी का भी ब्लॉग खोले।
पहला कदम
मान लो आपने jatdevta.blogspot.in खोला हुआ है। यहाँ आप देखेंगे कि ब्लॉग के सबसे ऊपर सीधे हाथ वाले कोने में आपको create blog & Login का Option दिख रहा है। नीचे वाला फोटो देखिये। इसमें आपको गोल घेरे में दिखाया गया है कि आपको कहाँ देखना है?




दूसरा कदम
अगले कदम में आपको अपनी ईमेल आईडी खाली स्थान में भरनी है। अगले चरण में अपनी मेल का पासवर्ड लिखे और अगले चरण की ओर कदम बढाये। अब आप login कर चुके हो। नीचे वाला फोटो देखिये।







तीसरा कदम
जैसे ही आप login करोगे तो एक नया पेज खुलेगा। इसमें आपको अपने ब्लॉग का नाम Title ऊपर लिखना होगा। नीचे वाले में ब्लॉग का पता web Address डालना है। यहाँ स्पष्ट कर दूँ कि आप अपने ब्लॉग का नाम टाइटल तो जितनी मर्जी बार बदल सकते हो लेकिन ब्लॉग का पता जो एक बार चुन लिया वह हमेशा वही रखना पडेगा। जैसे मेरे ब्लॉग का पता jatdevta.blogspot.in है। यह jatdevta कभी नहीं बदल सकता। आखिरी वाले .in का .com या कुछ अन्य सम्भव है। जो एक बार गुगल वालों ने बदल भी दिया है। नीचे वाला फोटो देखिये।



चौथा कदम
आपको सलाह है कि आप अपने ब्लॉग का पता ब्लॉग के विषय से related ही रखे। शुरु में थोडी कोशिश करे कि आपको आपके स्वयं के नाम का टाइटल मिल जाये। यदि आपके नाम का टाईटल उपलब्ध ना हो तब, अपने विषय से सम्बंधित title ही चुने। जैसे यात्रा वाले है तो travel के साथ अपना नाम जोड कर लिखे। it या technical, education आदि विषय पर ब्लॉग बनाना हो तो वैसा ही टाइटल चुनने की कोशिश करे। आगे क्लिक करते ही आपका ब्लॉग आपके सामने आ जायेगा।
यहाँ एक सलाह है कि ब्लॉग का ज्यादा लम्बा पता न चुने। नाम में संख्या digit भले ही रख लो लेकिन इसमें /-_= जैसे निशान भूल कर भी न लगाये। बहुत से पाठक इनसे परेशान हो जाते है। ऐसे लिंक याद रखना कठिन काम है।



पाँचवा कदम
अब इसी विषय पर विस्तार से बात करते है। नीचे वाले फोटो को देखिये। आपके ब्लॉग बनते ही सबसे पहले new post लिखा दिखाई दे रहा होगा। इसे क्लिक करेंगे तो आपके सामने नया पेज खुलेगा। अब आपको अपने लिखने की शुरुआत करनी होगी। यदि पहले से word page पर लिखा हुआ है तो बहुत बढिया रहेगा, नहीं तो online भी लिख सकते हो।
नये पेज को समझने के लिये नीचे नीचे वाले फोटो को देखिये।



छटा कदम
अब जो नया पेज खुला है वह एकदम खाली है। इसमें आपको दो खाली बाक्स दिखाई दे रहे है। ऊपर वाले छोटे बाक्स में पोस्ट/लेख का नाम लिखना है जैसे आप लेह लद्धाख के चददर ट्रैक पर लिखना चाहते हो तो ऊपर वाले बाक्स में लिखिये “” चददर ट्रैक, लेह लद्धाख”” इसमें आप हिन्दी, अंग्रेजी या अन्य किसी भी भाषा में लिख सकते हो।



सातवाँ कदम
अब नीचे वाले बडे बाक्स की ओर आते है। यह बडा बाक्स ही आपका लेख है जिसमें आपको विस्तार से अपना पूरा विवरण देना है। कोशिश करे कि एक लेख को 1000-2000 शब्दों के बीच रखने की कोशिश करे। ज्यादा छोटा व ज्यादा लम्बा लेख बोरिंग लगने लगता है। हाँ यदि किसी रोमांचक यात्रा या विषय पर लिख रहे हो तो फिर चाहे 3000 शब्द ही हो जाये कोई चिंता नहीं करना। उबाऊ लेख लिख रहे हो तो 500-700 शब्द भी भारी पड जायेंगे।



आठवाँ कदम
पोस्ट /लेख लिखने के लिये हो सके तो वर्ड पेज पर पहले आराम से लिख ले। लिखने के बाद उसे कम से कम दो बार पढ ले। पहली बार पढेंगे तो उसमें बहुत सारा बदलाव हो ही जाता है। तीसरी बार पढने पर उसमें बची खुची गलतियाँ भी खत्म हो जाती है।
यहाँ मैं बिना नाम लिये कुछ बडे ब्लॉगर व पुराने ब्लॉगर के बारे में कहना चाहूँगा। कुछ भाई लोग अपने अधिकतर लेख एक बार लिखकर उसे बिना जाँचे ऐसे ही पोस्ट कर देते है जिसकी अधिकतर बार तो व्याकरण तक सही नहीं रहती, ना पढने में उसकी लय बन पाती है।
वर्ड पेज पर लिखा लेख एक बार में ही पूरा का पूरा कॉपी पेस्ट कर चस्पा कर दीजिए। लिखने के बारे में मैं सिर्फ इतना ही कहूँगा कि किसी की भी नकल ना करे। आप अपने स्वयं के मन से लिखिए। दिल  ना सुनना, दिल धोखा दे जाता है। प्राकृतिक शब्दों में जो लय-ताल मिलती है वो बनावटी लेख में देखने को नहीं मिलती है। हर किसी की अपनी सोच है जैसा मन आये, वैसा लिखिये। बस ध्यान रहे कि लेख के मूल से ना भटकिये।
लिंक लगाना



नौवा कदम
पोस्ट में लिंक लगाना बहुत आसान काम है। आपको जिस लाइन या शब्दों पर लिंक लगाना हो उसे माउस से सलेक्ट करे और नीचे फोटो में बताये गये गोले घेरे वाले link लिंक पर क्लिक करे। नया छोटा सा पेज खुलेगा। इसमें आपको वह लिंक लगाना है जिसके बारे में आप बताना चाह रहे हो। यह लिंक web address आपके ब्लॉग का हो या दूसरे किसी अन्य के ब्लॉग का भी हो सकता है। लिंक देने के बाद इस छोटी विंडों में नीचे Ok करना न भूले।




अक्षर मोटे करने या रंग बिरंगे करने।
दसवाँ कदम
इसकी आवश्यकता आपको कम ही होनी चाहिए। यदि आपको अपने लेख में मोटा-पतला या रंग बिरंगा करना ही हो तो नीचे वाले फोटो को देखिये, आपके काम आयेगा। वैसे सच बताऊ तो मुझे इसकी आवश्यकता आज तक न पडी। मैं तो वर्ड पेज (word page) पर ही मोटा-पतला और रंग बिरंगा करके ही सीधा चेपता आया हूँ।



फोटो लगाना व साइज छोटा बढा करना
ग्यारहवाँ कदम
चलिये अब फोटो लगाने की ओर बढते है। फोटो लगाना तो बहुत आसान काम है। आजकल तो जियो व एयरटेल आदि के 4G ने तेज गति से समाँ बाँध रखा है। जब हमने ब्लॉग शुरु किया था। तब 2 G की महान गति से देर रात को जागकर लेख में फोटो लगाने पडते थे। घरवाले व पडौसी सोचते थे कि इसका किसी से चक्कर चल रहा है। उन्हे क्या पता हम लैला-मजनू तो ब्लॉग के चक्कर में पडे हुए थे।
नीचे वाले फोटो को देखिये। इसमें गोल घेरे में फोटो जोडने वाला बटन है। यहाँ क्लिक करते ही नया पेज खुलेगा।



फोटो के साइज का ध्यान रखना
बारहवाँ कदम
अब जो पेज खुला है इसपर क्लिक करने पर आपको अपने लैपी या Computer के उस फोल्डर तक पहुँचना होगा। जहाँ से आपको फोटो लगाने है। मैं तो फोटो चुनकर डेस्कटॉप पर एक फोल्डर में रख लेता हूँ। कोशिश करिये कि आपके फोटो 100-150 kb के आसपास साइज के हो। ज्यादा बढे फोटो आपका व पढने वालों का डाटा व समय ही खायेंगे। ज्यादा बढे साइज से फोटो से आपका ब्लॉग भारी भी हो जायेगा।






तेरहवाँ कदम
फोटो जोडने के बाद अगले चरण की ओर बढते है। अब आपको फोटो के बारे कुछ जानकारी देनी है तो किसी भी फोटो पर क्लिक करेंगे तो देखेंगे कि इसमें बहुत सारे option दिखाई दे रहे है। इसमें caption भी दिख रहा है। यह फोटो के बारे में जानकारी लिखने के लिये होता है। इसी में आपको फोटो के साइज छोटा बडा करने का प्रबंध भी मिलता है। आप large या extra large size कर सकते हो। यह आप पर निर्भर है कि आप क्या चाहते है? अपने मन की करिये या जो आपके पाठक चाहते है, वह करे।



Insert jump break पोस्ट कहाँ तक फीड में दिखे
चौदहवाँ कदम
फोटो के काम को पूरी तरह समझ गये। चलो अब आगे बढते है। अब पोस्ट के दो टुकडे करते है। ऊपर की कुछ लाइन छोडकर आपको insert jump break देना है यहाँ से आगे का भाग तभी दिखेगा, जब कोई आपका ब्लॉग खोलेगा। बहुत से बन्धु सिर्फ़ रीडर या ऐप में पढकर फ्री हो जाते है। उन्हे थोडी मेहनत तो करने दीजिए।




Lebal लेबल
पंद्रहवाँ कदम
पोस्ट तैयार हो गयी तो अब लेबल लिखने की बारी आती है। पहले यह जानना जरुरी है कि लेबल क्या है? लेबल समझ लीजिए कि किसी लेख के बारे में दो-चार शब्दों में समझाने की ओर ईशारा करने की कोशिश होती है। मान लो आपने विदेश यात्रा पर लेख तैयार किया है। यहाँ आपके लेबल होने चाहिए विदेश यात्रा, भूटान, अमेरिका, जर्मनी, रेल यात्रा, हवाई यात्रा, आदि आदि। लेबल दो चार शब्दों में लेख की झलकियाँ समझाने को काफी है।



Schedule समयसूची
सौलहवाँ कदम
बहुत से ब्लॉगर इस बात पर ध्यान नहीं देते है कि उनका लेख किस समय छ्प कर लोगों को दिखाई दे रहा है। जिस प्रकार आप हर चीज के समय निर्धारित करते है उसी प्रकार अपने ब्लॉग के प्रत्येक लेख के लिये एक निश्चित समय पक्का कर दीजिए। जैसे सुबह के 6-7 बजे का समय सबसे अच्छा माना जाता है। बाकि तो आपकी इच्छा है कि उसे कब छापना है? आप जिस दिन और जिस समय का समय फिक्स करेंगे लेख उसी समय सबको दिखाई देगा। आप चाहे तो महीने भर तक लेख तैयार कर पहले ही लगा सकते है।




Preview छापने से पहले पोस्ट जाँचना
सत्रहवाँ कदम
अब बात आती है कि लेख छपने के लिये तैयार कर दिया गया है लेकिन लेख छपने के बाद कैसे दिखाई देगा? यह प्रश्न भयंकर होता है।
इसका समाधान है preview नामक सुविधा इससे छुटकारा दिलाती है। आपने लेख schedule में भले ही दस दिन बाद का लगाया हो, लेकिन आप उसे अभी देख कर जाँच सकते हो कि कैसा दिखाई देगा? यदि आपको कुछ गलतियाँ मिले तो उसे सुधार ले। छपने के बाद सुधारना घोर लापरवाही माना जाता है।




ब्लॉगर प्रोफाइल कैसे बनाये
अब ब्लॉग का काम तो समाप्त हो गया है लेकिन ब्लॉगर के लिये सबसे बडी बात उसकी खुद की पहचान होती है। लोगों को पता चलना चाहिए कि लिखने वाला कौन है? उसकी पसन्द, इच्छा आदि क्या-क्या है? आप अपने बारे में अपनी प्रोफाइल में अवश्य लिखे।




ब्लॉग का लाभ-हानि
अपने स्वयं के ब्लॉग का यही लाभ होता है कि हमें किसी दूसरे की वेबसाइट पर मुँह ताकना नहीं पडता है। यदि आप दूसरों की साइट पर लिखोगे तो उनकी कुछ शर्ते माननी ही पडेगी। ब्लॉग आपका स्वयं का होगा तो आप खुद के राजा होंगे। आपकी मेहनत का श्रेय भी आपको ही मिलेगा। दूसरों के यहाँ लिखोगे तो बहुत समझौते करने पडते है। यदि आप आगे चलकर कोई पुस्तक आदि लिखने का विचार भी बना रहे है तो आरम्भ से ही गम्भीर होकर लेखन कार्य करिये।
टिप्पणी Comment
किसी भी ब्लॉग या साइट के लिये कमैंट बहुत मायने रखते है। आज के युग में हर कोई चाहता है कि पढने वाले अपने विचार कमेन्ट में जरुर रखे। आपने देखा होगा कि फेसबुक Facebook, व्हाटसअप WhatsApp आदि पर लोग एक दूसरे को जमकर कमेंट करते है। ठीक उसी तरह आपको हर उस ब्लॉग या फेसबुक आदि पर अपने विचार रखने चाहिए जिसको आपने पढा है। जरुरी नहीं है कि आप उसमें बुराई ही लिखे, वैसी बुराई लिखनी भी नहीं चाहिए। काने को काना कहोगे तो बुरा मान जाता है। भिखारी को प्रवचन देने का कोई प्रभाव नहीं पडता है। फिर भी कुछ सुधारने की, कुछ सम्भावना की, कुछ शाबासी की लिखकर देखिये तो सही। बढिया पाठक अपने विचार लिखेंगे तो लेखक भी बढिया-बढिया लेख जल्दी-जल्दी लाता रहेगा।
यदि आपने किसी का, कही भी, कोई भी लेख आदि पढा है तो उस पर अपना कमैंट अवश्य देना चाहिए। कौन जाने कि कमैंट करते-करते आप भी लिखना आरम्भ कर डालो। जैसा मैंने किया है। मैं लिखने से पहले दो साल तक सिर्फ कमैंट ही करता था। (समाप्त)

28 टिप्‍पणियां:

Achal Kumar Gaur ने कहा…

आपने बहुत अच्छी जानकारी दी है। धन्यवाद।

Jitender Mishra ने कहा…

Sandeep ji maine manu bhai se puchi thi unhone bhi yehi bat batyee thi baki aap ne Chhilke nikal diye

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (25-11-2017) को "ब्लॉग कैसे बनाये और लेख कैसे लगाये" (चर्चा अंक-2798) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Meena Sharma ने कहा…

बहुत उपयोगी जानकारी दी है आपने ।

Meena Sharma ने कहा…

बहुत उपयोगी जानकारी दी है आपने । सादर धन्यवाद।

Vasant Patil ने कहा…

नए ब्लॉगर बनने वालों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी

Nitu Thakur ने कहा…

आपने बहुत अच्छी बहुत उपयोगी जानकारी दी है। धन्यवाद।

Purushottam kumar Sinha ने कहा…

उपयोगी जानकारी

Kavita Rawat ने कहा…

ब्लॉग बनाने के इच्छुक लोगों के लिए लिए बहुत उपयोगी जानकारी प्रस्तुत की है आपने, सार्थक प्रस्तुति

http://www.kavibhyankar.blogger.com ने कहा…

आदरणिये जी आपने बहुत बहुत ही सुंदर जानकारी दी है मै इसे गूगल पल्स मे सैयर कर रहा हूँ ।। ज्ञान तो बाटना चाहिये ना इस लिये ।। जिनको लेना होगा ले लेंगे

http://www.kavibhyankar.blogger.com ने कहा…

बहुत बहुत सुंदर आदरणिय जी

Surendra shukla" Bhramar"5 ने कहा…

उपयोगी जानकारी

राजेश सहरावत ने कहा…

यह लेख आपने कम से कम 5 साल पहले लिखना चाहिए था

Harjinder Anoopgarh ने कहा…

बहुत कीमती जानकारी दी है भाई धन्यवाद

Jyoti Dehliwal ने कहा…

उपयोगी जानकारी।

रोहित कल्याणा (Rohit kalyana) ने कहा…

लेख के साथ-साथ फोटो के इस्तेमाल ने इसे आसान बना दिया है समझने के लिए । आशा करता हूँ अधिक-से-अधिक पाठक इस पोस्ट को पढ़कर लिखने के लिए उत्सुक होंगे । मेहनत से लिखे इस पोस्ट के लिए आपको धन्यवाद संदीप भाई । शुभकामनाएं और सम्मान...

लोकेन्द्र सिंह परिहार ने कहा…

बहुत ही बढ़िया जानकारी

Pardeep Kumar ने कहा…

वाह संदीप जी शानदार जानकारी है । आपके इस ब्लॉग को पढ़कर ही मैंने अपना ब्लॉग बनाया है
आपको कोटि-कोटि नमन:

SANDEEP PANWAR ने कहा…

लेख सफल हुआ।

Kavita Rawat ने कहा…

आपका नववर्ष मंगलमय हो

Sachin tyagi ने कहा…

वाह भाई, कभी आपका ब्लॉग पढकर ही मैने एक ब्लॉग बनाया जिसपर मैं लिखता हूं। लेकिन बहुत सी बाते मुझे आजतक भी नही पता थी जो आज पता चली। धन्यवाद भाई

संजय भभुआ ने कहा…

देवता जी। ज्ञानवर्धन के लिए शुक्रिया।एक बात और बताएं।मेनू कैसे बनाते है।जैसे होम,उत्तराखंड,जम्मू कश्मीर,इत्यादि।

SANDEEP PANWAR ने कहा…

सैटिंग ले आउट में जाकर,नया पेज बनाये।
एक साथ ही 6,7 बना ले।
फिर इन्हें पब्लिश व सेव कर ले।
ध्यान रहे कि यह पेज हैडर के नीचे क्रास कालम में बनाना है।

Karunakar Pathik ने कहा…

संदीप जी आप का यही ब्लॉग पढ़ कर मेरे मन में ब्लॉग बनाने की इच्छा जागृत हुई। और मैंने एक यात्रा ब्लॉग भी बनाया। सबसे ख़ुशी मुझे तब हुई जब आपका कमेंट भी मुझे मेरे ब्लॉग पर मिला। धन्यवाद संदीप जी...

Karunakar Pathik ने कहा…

संदीप जी ब्लॉग में जो फोटो लगाने के बाद वो बहुत साफ़ नहीं दिखते पर जब उन्हें ज़ूम करता हूँ तो वो साफ़ दिखते है। ऐसा क्यों हो रहा है और इसे कैसे ठीक किया जाये?
कृपया मार्गदर्शन करे।

Gourav Singh Chanana ने कहा…

बहुत अच्छा ब्लॉग है सर, हमे तो ब्लॉग मैं ये समझ नहीं आ रहा कि folder कैसे बनाए जैसे Himachal का अलग से uttrakhand Yatra का अलग से

Ashish Mishra ने कहा…

उत्तम

Naresh Lahiri ने कहा…

संदीप भाई धन्यवाद,आपका यह ब्लॉग पढ़कर मेरी कई समस्याओं का समाधान मिल गया है।
मैं भी ब्लॉग लिखना चाहता था जिसका रास्ता आपने मुझे दिखा दिया।

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