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शनिवार, 20 जुलाई 2013

Kurunda नान्देड़ सचखन्ड़ गुरुद्धारा व कुरुन्दा गाँव

LTC-  SOUTH INDIA TOUR 07                                                                           SANDEEP PANWAR
हमने सुबह 9 बजे ही शिर्डी छोड़ दिया था मन्दिर से थोड़ा सा आगे बने हुए बस अड़ड़े पहुँचे तो वहाँ एक वैन वाला पीछे पड़ गया। जब हम बस अडड़े में घुस रहे थे तो हमसे वहाँ खड़े वैन वालों ने पूछा था कि कहाँ जाओगे? मैंने कहा कि मनमाड़ जाना है लेकिन बस में जाना है, वैन में चलो, ना वैन में ज्यादा किराया लगेगा, उतने पैसे हमारे पास नहीं है, लगता था कि वैन वाला भी खाली वैन लेकर मनमाड़ नहीं जाना चाहता था। उसने कहा बस में 40 रुपये लगते है आप दोनों के 100 रुपये दे देना। अरे वाह, यह तो अपने आप ही ठीक किराया माँग रहा है, लेकिन तुम कई सवारी लेकर जाओगे हमें 10:30 पर मनमाड़ से रेल पकड़नी है। वैन वाला बोला अपको आपकी ट्रेन से पहले पहुँचा दूँगा। यहाँ सिर्फ़ 5-7 मिनट देखता हूँ, सुबह के समय मुश्किल से ही सवारी मिलती है। अगर कोई और नहीं मिला तो आप दोनों को लेकर जरुर जाऊँगा। थोड़ी देर तक जब कोई सवारी दिखायी नहीं दी तो वह हम दोनों को लेकर मनमाड़ की ओर चल दिया।
केले की फ़सल

शुक्रवार, 21 जून 2013

NANDED GURUDWARA नान्देड़ गुरुद्धारा श्री सचखन्ड़ नानक धाम

EAST COAST TO WEST COAST-19                                                                   SANDEEP PANWAR
नान्देड़ निवासी मदन वाघमारे (मैं उन्हे बाघमारे ही कहकर बुलाता हूँ) अपनी बाइक पर मुझे लेकर पहले अपने ठिकाने पर पहुँचे, यहाँ इनका कार्यस्थल उसी फ़्लाईओवर के किनारे है जो फ़्लाईओवर नान्देड़ बस अड़ड़े के ऊपर से होकर गुरुद्धारे की ओर जाता है। इनकी कार्यस्थली में जाते ही वहाँ की गर्मी से कुछ देर के लिये राहत मिली, क्योंकि उन्होंने वातानुकूलित यंत्र चलाया हुआ था। पानी पीने के उपराँत अपना बैग वही छोड़कर मैं एक बार मदन की बाइक पर सवार हो गया। बस अड़ड़े से सचखन्ड़ गुरुद्धारा मुश्किल से एक सवा किमी के बीच ही है इसलिये हमें वहाँ पहुँचने में तीन-चार मिनट ही लगें होंगे। गुरुद्धारे पहुँचने से पहले हम गुरु गोविन्द सिंह अस्पताल के बाहर से होकर गये थे। यहाँ अस्पताल के पास एक चौराहे से सीधे हाथ मुड़ते ही अस्पताल आया था। सड़कों पर गुरुद्धारे का मार्ग बताने के लिये मार्गदर्शक निशान बनाये गये है। सड़क पर लगाये गये दिशा सूचक बोर्ड़ से बाहर से आने वाली जनता को बहुत लाभ होता है बार-बार स्थानीय बन्दों से पता करने का झंझट ही नहीं रहता है।


गुरुवार, 20 जून 2013

Orange Garden and back to Nanded संतरे के बगीचे में भ्रमण व नान्देड़ रवानगी

EAST COAST TO WEST COAST-18                                                                   SANDEEP PANWAR
हम वापिस बाइक के पास आये तो संतोष की माताजी व पिताजी जो कि खेत में ही निवास करते है। दोपहर के भोजन की तैयारी में संतोष की माताजी तैयार बैठी थी, जब हम उनके पास पहुँचे तो चूल्हे पर बनी ताजी रोटियाँ देखकर हम अपने आप को रोक ना सके। रोटियाँ खाते समय बसन्ता की बात का भी ध्यान रख रहे थे उसने कहा था कि दोपहर का खाना उसके घर पर खाना है। माताजी के हाथ व चूल्हे पर रोटियाँ का स्वाद बेहद ही स्वादिष्ट था। हमने कब तीन-तीन रोटियाँ चट कर डाली, पता ही नहीं लगा। हम रोटी खाकर उठे भी नहीं थे कि बसन्ता वहाँ आ पहुँचा। उसने हमें रोटी खाते देखकर कहाँ मैं आपके लिये दोपहर का भोजन बनवा कर तैयार करवा रखा है और आपने यही पेट फ़ुल कर लिया, अब हमारे घर क्या खाओगे? मैंने कहा देख भाई तेरा पाला अब से पहले जाट से नहीं पड़ा है जाट वो बला है जिससे मुगल तो मुगल अंग्रेज भी थर्राते थे।



बुधवार, 19 जून 2013

Maharashtrian Marriage rituals (preparation) महाराष्ट्रियन गाँव में शादी की तैयारियाँ

EAST COAST TO WEST COAST-15                                                                   SANDEEP PANWAR
रात को करीब आठ बजे जाकर कुरुन्दा गाँव में पहुँचना हो सका। वहाँ जाकर देखा कि अधिकतर लोग कल होने वाली शादी के कार्य की तैयारी में लगे पड़े थे। मेरे लिये यह पहला मौका था जब मैं किसी महाराष्ट्रियन शादी में शामिल होने जा रहा था अभी तक मैंने उत्तर भारतीय हिन्दी भाषी राज्यों की शादियाँ ही देखी थी। रात को कोई नौ बजे के आसपास बाबूराव (जिनके यहाँ शादी थी) की इकलौती व सबसे छोटी लड़की की कुछ रस्म करने के लिये पन्ड़ाल में लाया गया। इस प्रकार रस्म हमारे यहाँ घर की चार दीवारी के अन्दर ही समपन्न करायी जाती है। इस रस्म के तुरन्त बाद लड़की घर के अन्दर चली गयी। रात में मैंने बाबूराव से पता किया कि आपके तो छोटे लड़के की भी कल इसी पन्ड़ाल में ही शादी होने वाली है ना, लेकिन वो कही नजर नहीं आ रहा है। मेरी बात का जवाब मिला कि हमारे यहाँ लड़का शादी से पहली रात ससुराल में बिताता है जहाँ उसको हल्दी आदि लगाने की रस्म निभानी होती है। ऐसा गजब कैसे?


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