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शुक्रवार, 3 मार्च 2017

Travel to Juhu chowpatty beach mumbai मुम्बई का खूबसुरत जुहू चौपाटी सागर तट/ बीच



अंडमान व निकोबार की इस यात्रा में आपने अभी तक पोर्टब्लेयर का Chidiya Tapu, डिगलीपुर में अंडमान की सबसे ऊँची चोटी Saddle Peak, अंग्रेजों की क्रूरता की निशानी Cellular Jail, Haw lock island के सुन्दर तट और खूबसूरत Neil island, अंग्रेजों का मुख्यालय Ross island, Samudrika संग्रहालय, Mount harriet National Park, Wandoor Beach, पोर्टब्लेयर का Jogger’s Park & Airport, Chennai Airport, Mumbai Airport देखा। इस यात्रा को शुरु से पढना हो तो यहाँ माऊस से चटका लगाकर  सम्पूर्ण यात्रा वृतांत का आनन्द ले। इस लेख की यात्रा दिनांक 30-06-2014 को की गयी थी
JUHU CHOWPATTY BEACH, MUMBAI & TRAVEL TO NEW DELHI मुम्बई का जुहू चौपाटी सागर तट देखकर दिल्ली प्रस्थान

शनिवार, 13 जुलाई 2013

Bombay to Delhi by Indian Railway बोम्बे से दिल्ली तक ट्रेन यात्रा

EAST COAST TO WEST COAST 36                                                                   SANDEEP PANWAR
विशाल के साथ दो दिन से यात्रा कर रहा था इससे पहले भी एक बार कई दिनों की यात्रा में हम साथ घूम चुके है। विशाल की आदत लगभग अधिकतर मिलती-जुलती सी है सबसे बड़ी आदत यह है कि विशाल भी हर हालत में अपने आप को ढाल लेता है। यात्रा में खर्चे तो दोस्ती पक्की लेकिन अपने-अपने वाला नियम रहता ही है इसका अपुन की तरह विसाल भी पूरा पालन करता पाया गया। विशाल के पास पहले भी एक-दो घुमक्कड़ दोस्त बोम्बे घूमने के लिये आ चुके है। शायद कोई ऐसी बात उनके बीच हुई थी कि जिसे बताने से विशाल बचता रहा। पहले तो मैं कोशिश की कि शायद बता दे लेकिन जब कई बार टटोलने पर भी वह बात को टाल गया तो मैंने भी बात आयी-गयी कर दी।



शुक्रवार, 12 जुलाई 2013

Bombay/Mumbai Local Train Journey (Information) and Tennis court मुम्बई लोकल ट्रेन की सम्पूर्ण जानकारी

EAST COAST TO WEST COAST 35                                                                   SANDEEP PANWAR
बोम्बे/मुम्बई का गेटवे ऑफ़ इन्डिया व ताज होटल देखने के बाद वापसी में चर्चगेट स्टेशन पहुँचने के लिये हमने पैदल चलने की जगह टैक्सी से दो किमी की दूरी तय करने का फ़ैसला किया। स्टेशन पहुँचकर बोला संदीप भाई आज आपको एक ऐसी चीज खिलाता हूँ जो शायद आपने अभी तक नहीं खायी होगी। क्यों भाई! ऐसी क्या चीज है? जो मैंने आज 38 वर्ष का होने तक नहीं खायी है, वैसे भी मैं शाकाहारी भोजन, सादा जल, व फ़लों के लावा और किसी पदार्थ का सेवन तो करता नहीं हूँ इसलिये ऐसी बहुत सी खाने लायक वस्तुएँ है जो मैंने अभी तक नहीं खायी है। विशाल और मैं स्टेशन पर प्लेटफ़ार्म की ओर जा रहे थे कि तभी वहाँ एक दुकान पर विशाल बोला रुको, संदीप भाई! पहले रोल जैसी वो स्वादिष्ट वस्तु खाते है फ़िर ट्रेन के लिये चलेंगे। (continue)


गुरुवार, 11 जुलाई 2013

Gateway of India and Taj Hotel गेटवे ऑफ़ इन्डिया और ताज होटल

EAST COAST TO WEST COAST 34                                                                   SANDEEP PANWAR
छत्रपति शिवाजी रेलवे टर्मिनल से गेटवे जाने के लिये हमने एक बार टैक्सी का सहारा लिया। बोम्बे में छोटी दूरियाँ तय करने के लिये दो/तीन बन्दों को टैक्सी सबसे सस्ती व उत्तम सेवा प्रतीत होती है। वैसे बोम्बे में ऑटो भी चलते है लेकिन टैक्सी व ऑटो के किराये में बहुत ज्यादा अन्तर ना होने के कारण टैक्सी को ही वरीयता देनी चाहिए। हम कुछ ही देर में गेट वे आफ़ इन्डिया के पास वाले चौराहे पर जा पहुँचे। यहाँ पर कई साल पहले हुई पाकिस्तानी फ़रीकों की शांतिप्रिय घटना जिसे हम लोग आतंकवादी घटना कहते है, के कारण सुरक्षा व्यवस्था कुछ ज्यादा ही चौकस कर दी गयी है। गेट वे इन्डिया जाने के लिये अब हर किसी को पोलिस (पुलिस) जाँच से गुजरकर ही आगे जाना पड़ता है। हम भी अपनी जाँच कराकर ही आगे बढ़ पाये।


बुधवार, 10 जुलाई 2013

CST Chatrapati Shiwaji Terminas/Victoria VT छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (सीएसटी/वीटी)

EAST COAST TO WEST COAST 33                                                                   SANDEEP PANWAR
नरीमन पॉइन्ट से बोम्बे की बेस्ट वाली बस में सवार होकर हम बोम्बे का मुख्य रेलवे स्टेशन देखने चल दिये। यहाँ हमारी बस लम्बा चक्कर लगाकर जाने वाली थी जब बस परिचालक से हमने टिकट के लिये कहा तो उसने कहा कि यह बस बहुत घूमकर जायेगी। बस कन्ड़क्टर को दो टिकट के पैसे देकर टिकट ले लिये गये। किसी जगह घूमने के लिये वहाँ के कई चक्कर लगाये जाये इससे बेहतर और क्या हो सकता है? हमारी बस बोम्बे हाईकोर्ट के सामने से होकर निकल रही थी तो विशाल ने मुझे बताया कि यह बोम्बे हाईकोर्ट है। अगर विशाल ने मुझे नहीं बताया होता तो मैं तो यही समझता रहता कि यह कोई किला आदि जैसा कुछ इमारत है। देखने में ही हाई कोर्ट किले जैसी ही प्रतीत होती है।


मंगलवार, 9 जुलाई 2013

Girgao Chopati And and Nariman Point गिरगाँव चौपाटी से नरीमन पॉइन्ट तक यात्रा

EAST COAST TO WEST COAST-32                                                                   SANDEEP PANWAR
बस से उतरने के बाद हम दोनों गिरगाँव चौपाटी देखने के लिये सड़क पार करने लगे। यहाँ सड़क पर बहुत ज्यादा संख्या में पुलिस बल देखकर मन में शंका हुई कि दिल्ली की तरह यहाँ भी बम आदि का विस्फ़ोट तो नहीं हो गया है। दिल्ली की तरह बोम्बे में आतंकवादी घटना घटित होना दैनिक क्रिया जैसा प्रतीत होने लगता है। हमने जैसे ही सड़क पार की तो सामने ही नाना-नानी पार्क के नाम से एक छोटा सा पार्क दिखायी दिया। हम अभी दो बड़े-बड़े पार्क देखते हुए आये थे इसलिये इस छोटे से पार्क को बाहर सड़क से ही सरसरी तौर पर देखते हुए आगे बढ़ते चले गये। नाना-नानी पार्क से आगे बढ़ते ही चौपाटी दिखायी देने लगती है। वैसे बस से आते समय समुन्द्र किनारे काफ़ी दूर तक का साफ़ नजारा दिखायी देता रहता है। 


सोमवार, 8 जुलाई 2013

Kamla Nehra Park कमला नेहरु पार्क व मुम्बई की बस सेवा बेस्ट की सवारी

EAST COAST TO WEST COAST-31                                                                   SANDEEP PANWAR
जिस सड़क से होकर हम यहाँ तह आये थे। उसके ठीक सामने फ़िरोजशाह गार्ड़न है जो शायद मुम्बई का सबसे बड़ा गार्ड़न भी हो सकता है। फ़िरोजशाह मेहता गार्ड़न को ही हैंगिंग गार्ड़न भी कहा जाता है कल के लेख में आप उसे देख ही चुके है। आज कमला नेहरु पार्क देखते है कमला नेहरु पार्क भी मालाबार हिल पर ही बनाया गया है। यह पार्क भी काफ़ी बड़ा है। कमला नेहरु पार्क के नाम से भारत भर में अधिकतर बड़े नगरों में पार्क बने हुए मिल जायेंगे। कमला नेहरु पार्क की सबसे बड़ी पहचान यह है कि इसमें एक जूते के आकार का बड़ा सा दो मंजिला आकार का सीमेंटिड़ नमूना बनाया गया होता है। बताते है कि कोई औरत किसी समय एक बड़े जूते में रहा करती थी उसकी याद में जूते की आकृति ही कमला नेहरु पार्क की पहचान बना दी गयी है। इस पार्क के अन्दर तो खूबसूरत नजारे है ही लेकिन इसमें सबसे बड़ी बात यहाँ से समुन्द्र की ओर देखने पर जो हसीन नजारे दिखायी देते है उसकी कल्पना नहीं की जा सकती है।


रविवार, 7 जुलाई 2013

Mumbai-Hanging Garden/ Firoz Shah Mehta Garden मुम्बई का हैंगिंग गार्ड़न/ फ़िरोज शाह मेहता गार्ड़न

EAST COAST TO WEST COAST-30                                                                   SANDEEP PANWAR
बाबुलनाथ मन्दिर देखने के बाद हम वापिस सड़क पर आये यहाँ पर विशाल ने मुम्बई की मालाबार पहाड़ी पर बने शानदार हैंगिंग गार्ड़न जिसे फ़िरोज शाह मेहता पार्क भी कहते है, में जाने का मार्ग पता किया। हमें बताया गया कि यदि आप लोग पैदल चलने की हिम्मत रखते हो यहाँ से आधा किमी पैदल मार्ग से उस पार्क में पहुँच सकते हो। यदि पैदल नहीं चल सकते हो तो बस से पूरी मालाबार हिल को कई किमी घूम कर आना होगा। हमने पैदल वाले शार्टकट से उस पार्क तक पहुँचने की योजना पर अमल करना शुरु कर दिया। जैसे हमें बताया गया था हम वैसे ही पहाड़ी पर ऊपर जाती हुई पक्की सीढियाँ चढ़ते हुए ऊपर चलते गये। कुछ देर बाद यह सीढियाँ जहाँ समाप्त हुई वहाँ पर हमें वह पार्क दिखायी देने लगा जिसे देखने हम बस से आने वाले थे।


शनिवार, 6 जुलाई 2013

Mumbai- Babulnath Temple मुम्बई का बाबुलनाथ मन्दिर

EAST COAST TO WEST COAST-29                                                                   SANDEEP PANWAR
बोम्बे के कई प्रसिद्ध मन्दिर देखने के उपराँत, यहाँ का मशहूर मन्दिर बाबुलनाथ देखने की बारी भी आ गयी थी। महालक्ष्मी मन्दिर से यहाँ पहुँचने के हमने एक टैक्सी से  इनके बीच का फ़ासला तय किया। मन्दिर सड़क से काफ़ी हटकर व अन्दर जाकर है जबकि टैक्सी ने हमें सड़क पर ही उतार दिया था। सड़क किनारे पर ही बाबुलनाथ मन्दिर चौक के नाम से एक बोर्ड़ भी लगा हुआ है। मैंने सोचा कि मन्दिर यही-कही सामने ही है लेकिन जब आसपास कही भी मन्दिर दिखायी नहीं दिया तो मैंने विशाल से कहा, क्यों महाराज बाबुलनाथ को बाबुल ने कहाँ छुपाया हुआ है? विशाल बोला थोड़ा सब्र रखो, सामने वाली गली में ऊपर चढ़ने पर मन्दिर आ जायेगा।


शुक्रवार, 5 जुलाई 2013

Triyambak Mahadev, Dhakleshwar, Maha Laxmi Temple, Patali Hanumaan Temple त्रयम्बक महादेव, धकलेश्वर महादेव, महालक्ष्मी, पाताली हनुमान मन्दिर

EAST COAST TO WEST COAST-28                                                                   SANDEEP PANWAR
महालक्ष्मी मन्दिर देखने जाते समय हमने एक टेक्सी पकड़ी। बोम्बे का यह फ़ायदा है कि यदि लम्बी दूरी तय करनी हो तो बस व लोकल रेल सेवा सस्ती व सुलभ साधन है लेकिन यदि छोटी दूरी तय करनी हो तो टैक्सी सबसे अच्छा साधन है। सड़क पर हम जहाँ टैक्सी से उतरे थे उसके ठीक सामने एक मन्दिर दिखायी दे रहा था। विशाल बोला चलो संदीप भाई पहले इसी मन्दिर से शुरुआत करते है। चल भाई मन्दिर कोई भी हो उससे अपुन को कोई फ़र्क नहीं पड़ता है। भगवान यदि कही है तो वह जरुर अपने हर मन्दिर में भी निवास करते होंगे, और यदि नहीं है तो फ़िर चाहे केदारनाथ हो या अमरनाथ फ़िर कही भगवान नहीं मिलने वाले। जिस मन्दिर में हम सबसे पहले पहुँचे उसका नाम है त्रयम्बकेश्वर महादेव मन्दिर।



Mumbai-Siddhi Vinayak Temple and Haji Ali Dargah बोम्बे का सिद्धी विनायक मन्दिर व हाजी अली की दरगाह/कब्र

EAST COAST TO WEST COAST-27                                                                   SANDEEP PANWAR
बोम्बे तो वैसे मैं पहले भी एक बार आ चुका था लेकिन उस समय बोम्बे के दादर स्टेशन के अन्दर से ही दूसरी ट्रेन में बैठकर हम नेरल के लिये चले गये थे। उस यात्रा में हमने भीमाशंकर का सीढ़ी घाट मार्ग से ट्रेक सफ़लता से किया था। जिसके बारे में मैंने आपको सम्पूर्ण विवरण पहले ही बता दिया है। आज रात बोम्बे के गोरेगाँव इलाके में एक फ़्लैट में निवास करने वाले विशाल राठौर के यहाँ रात्रि विश्राम करने की योजना पहले से ही बना ली गयी थी। जैसे ही मैं दर्शन जी के घर से चला था तो विशाल को सूचित कर दिया था जिससे यह लाभ हुआ कि स्टेशन से बाहर निकलते ही विशाल मेरा इन्तजार करता हुआ मिल गया। विशाल के साथ पूरे दिन माथेरान की छोटी रेल व अन्य स्थल की ट्रेकिंग की गयी थी। कल का दिन बोम्बे के नाम रहने वाला था।



मंगलवार, 26 मार्च 2013

Delhi-Bombay(Dadar)-Narel-Khandas दिल्ली-दादर-नेरल-खंड़स तक।

महाराष्ट्र के भीमाशंकर-नाशिक-औरंगाबाद की यात्रा-01                                            SANDEEP PANWAR


बीते साल 2012 में जुलाई माह की बात है मुम्बई में रहने वाला दोस्त विशाल राठौर कई बार भीमाशंकर ट्रेकिंग की बात करता रहता था। पहले तो मन में वहाँ जाने का विचार ही नहीं बन रहा था लेकिन विशाल के बार-बार बुलाने के कारण मैंने रेल से बोम्बे जाने के लिये गोल्ड़न टेम्पल मेल से अपना टिकट बुक कर ही दिया था। दिल्ली से बोम्बे तक पहुँचने में कोई खास घटना नहीं घटी थी इसलिये उसका कोई विवरण नहीं दे रहा हूँ। यह ट्रेन सुबह 5 बजे दादर रेलवे स्टेशन पहुँच जाती है। यहाँ पर जैसे ही ट्रेन प्लेटफ़ॉर्म पर रुकी तो विशाल अपने कोच के ठीक सामने खड़ा दिखायी दिया। पहले तो गले मिलकर एक दूसरे का स्वागत किया गया। इसके तुरन्त बाद हम दोनों वहाँ से बम्बई लोकल ट्रेन में बैठने के लिये फ़ुटओवर ब्रिज पार कर दूसरी ओर लोकल वाली लाईन पर पहुँच गये। यहाँ पर विशाल ने अपने कार्ड़ से हम दोनों का दादर से नेरल तक जाने का टिकट ले लिया था। 
जाटदेवता के कदम बोम्बे में पड़ ही गये।

बोम्बे लोकल अपनी गति से दौड़ी जा रही है।

इस यात्रा के समय ही मेरे पहली बार बोम्बे की भूमि पर कदम पड़े थे। तो जाहिर है कि बोम्बे लोकल में भी पहली बार सवारी हो रही थी। सुबह का समय होने के कारण बम्बई की जीवन रेखा/ life line कही जाने वाली लोकल रेल में ज्यादा भीड़भाड़ नहीं थी। एक दिन पहले ही बोम्बे का गणपति उत्सव समाप्त हुआ था जिस कारण थोड़ी बहुत भीड़ भी 10-15 किमी तक ही दिखायी दी थी। शुरु में हमें दादर स्टेशन से सीट नहीं मिल सकी थी, लेकिन इस रुट पर नजारे देखने की इच्छा के कारण सीट मिलने का लालच भी नहीं हो रहा था। शुरु-शुरु में विशाल ने मुझे कई बार टोका कि तुम दरवाजे पर खड़े हो, सावधानी से खड़े रहो। गिर जाओगे। बैग को सम्भाल कर पकड़ो। मुझे कई बार विशाल पर आश्चर्य भी हुआ कि अरे यह बन्दा क्या मुझे अनाड़ी समझ रहा है। लेकिन विशाल की चिंता अपनी जगह सही थी, बोम्बे में गेट पर लटकने के कारण हर साल सैंकड़ों हादसे होते रहते है। बिना किसी परेशानी के अपना सफ़र चलता रहा।

कोई बात नहीं इस बार ना सही अगली बार यात्रा करनी ही है।

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