गुरुवार, 30 मई 2013

Visakhapatnam-Ramanaidu Film studio विशाखापटनम का रामानायड़ू फ़िल्म स्टूड़ियों

EAST COAST TO WEST COAST-03                                                                   SANDEEP PANWAR
कैलाश-गिरी पर्वत के बाद हमारी कार समुन्द्र किनारे भागी जा रही थी। नारायण जी अगले साल रिटायर होने वाले है लेकिन उनका जोश-जिगर देखकर नहीं लगता है कि अगले साल रिटायर कैसे? गजब की ड्राईविंग करते है, चूंकि मैं स्वयं कार चलाना भी जानता हूँ और पहाड़ों पर सपिवार कार चलाकर यात्रा की हुई है, इसलिये नारायण जी की हिम्मत देखकर आनन्द के साथ हिम्मत बढ़ती है कि अरे हम तो अभी 40 के भी नहीं हुए है। अचानक नारायण ने कार रोक कर पूछा, संदीप भाई फ़िल्म सिटी देखी है। मैंने कहा कि मैं फ़िल्मे ही कम देखता हूँ फ़िल्म सिटी वाले शहर में अभी तक सिर्फ़ नौएड़ा ही देखा है बोम्बे अब आपके यहाँ से जाऊँगा। लेकिन वहाँ फ़िल्म सिटी देखने नहीं जाऊँगा। नारायण जी बोले तो चलो आज विशाखापट्टनम की मशहूर फ़िल्म सिटी दिखाता हूँ। हमारी कार समुन्द्र किनारे वाली मुख्य सड़क छोड़कर फ़िल्म सिटी की ओर चढ़ चली। आधे किमी की ऊँचाई पर कई घुमावदार मोड़ पार करने के बाद रामानायडू फ़िल्म सिटी आई। टिकट लेकर नारायण जी ने मुझे अन्दर चलने को कहा। आप भी चलिये, देखिए सचित्र रामानायडू फ़िल्म सिटी।


बुधवार, 29 मई 2013

Visakhapatnam- Kailash giri parvat विशाखापट्टनम का कैलाश गिरी पर्वत

EAST COAST TO WEST COAST-02                                                                   SANDEEP PANWAR
विशाखापटनम को विजाग भी कहा जाता है मुझे इस बात का पता ही नही था। हम स्टेशन से समुन्द्र की ओर चल पड़े। नारायण जी बोले, संदीप भाई विजाग में कहाँ-कहाँ घूमना चाहोगे? मैंने कहा, मैं आज दोपहर से लेकर कल शाम तक पूरे ड़ेढ़ दिन तक आपके साथ हूँ आपके नजरिये से जो देखने लायक कुदरती स्थल है उन्हे ही दिखा दिजिएगा। इस तरह शहर के टेड़े मेड़े मार्गों से होते हुए हम समुन्द्र किनारे जा पहुँचे थे। अगर आज मुझे अकेले को स्टेशन से समुन्द्र किनारे उसी जगह जाने को कह दिया जाये तो पता नहीं कितने झमेले झेलने पड़ेंगे? तब जाकर मैं समुन्द्र किनारे पहुंच पाऊँगा। समुन्द्र किनारे पहुँचने से पहले नारायण जी ने एक जगह अपनी कार रोकी और बताया कि सड़क किनारे जो छोटा सा मन्दिर दिखायी दे रहा है यहाँ इस मन्दिर में अधिकतर वही लोग आते है जो नई गाड़ियाँ खरीदते है। हम कह सकते है कि वह नन्हा सा मन्दिर विजाग में खरीदी जानी वाली गाड़ी के लिये आशीर्वाद प्रदान करता है कि जा बच्चा, सुरक्षित रहेगा, यदि सीमित गति में वाहन दौडायेगा।


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