UJJAIN-JABALPUR-AMARKANTAK-PURI-CHILKA-20 SANDEEP PANWAR
नर्मदा उदगम स्थल मन्दिर में प्रवेश करने से पहले
जूते-चप्पल बाहर ही उतारने होते है। मन्दिर की चारदीवारी के बाहर ही एक बन्दा दाल-चावल
माँगने के लिये बैठा हुआ था। मैंने अपनी चप्पले उसके पास ही छोड़ कर आगे बढ़ चला। वैसे
तो अपने पास चप्पल रखने के लिये बैग भी था लेकिन वहाँ भीड़ भाड़ ज्यादा ना होने के कारण
मैंने चप्पल खुले में ही छोड़नी ठीक समझी। मन्दिर के अन्दर प्रवेश करते ही सबसे
पहले मेरी नजर नर्मदा कुन्ड़ पर गयी। मैंने मन ही मन नर्मदा को स्मरण किया। यह वही
नर्मदा थी जिसे मैंने अब तक ओमकारेश्वर में व भेड़ाघाट में विकराल रुप में देख चुका
हूँ लेकिन यहाँ तो नर्मदा एकदम शांत एक कुन्ड़ में सिमटी हुई मिली।

