दोस्तों नई यात्राएँ तो होती ही रहेंगी, लेकिन कई पुरानी यात्राएं भी है जिनका जिक्र करना जरूरी है अगर नई-नई यात्रा का विवरण ही बताता रहा तो पुरानी का नम्बर कभी भी नहीं आयेगा क्योंकि जिस गति से अपनी नई-नई यात्राओं की संख्या बढती जा रही है उससे तो ऐसा नहीं लगता कि यह सिलसिला जीते जी कभी रुकने वाला भी है। पुरानी यात्राओं में वैसे तो मैंने सबसे पहले देहरादून के पास सह्रसधारा की यात्रा की थी। उसके बाद देहरादून के पास के लगभग सारे स्थान मैंने साईकिल पर ही छानमारे थे। मंसूरी, धनौल्टी, चम्बा, सुरकन्डा देवी, बाइक पर उतराखण्ड के चार धाम गंगौत्री-यमुनौत्री-केदारनाथ-बद्रीनाथ, फ़ूलों की घाटी, हेमकुंठ साहिब, चोपता, रोहतांग, मणिकर्ण, ज्वालामुखी आदि-आदि न जाने कितनी यात्राएँ अभी बाकि है? अबकी बार मैं आपको उन्ही सब पुरानी यात्राओं में से कुछ के बारे में बताने जा रहा हूँ, मेरी कोशिश क्रमवार यात्रा विवरण बताने की रहेगी। समय काफ़ी बीत चुका है जिस कारण सब यात्राओं का समय तो ठीक-ठीक याद नहीं है लेकिन फ़िर भी जितना हो सका, उतना इन्साफ़ जरुर करने की कोशिश जरुर करूँगा। इन यात्राओं में मैंने लगभग सभी साधन प्रयोग किये है जैसे कि साईकिल, बस, रेल, ट्रक, कार आदि तो आज आपको दिल्ली से सहारनपुर तक की रेल यात्रा के बारे में बताने जा रहा हूँ।
सोमवार, 6 अगस्त 2012
मंगलवार, 17 जुलाई 2012
NAINITAL TO DELHI TRAIN JOURNEY नैनीताल से दिल्ली रेल यात्रा
ताल ही ताल-
जब हम तीनों नैनी ताल झील से नाव भ्रमण करके बाहर आये तो समय देखा, कि अभी तो पाँच बजने वाले है, मेरा अब यहाँ कुछ और देखने का मन नहीं था जिस कारण दिल्ली की ओर चलने का कार्यक्रम बनने लगा, लेकिन अपने दोनों साथी का मूड देखा लो लग रहा था कि ये दोनों अभी यहाँ से चलने वाले नहीं है, इन्होंने अभी अपनी पीने की हसरत पूरी करनी थी जिस कारण यह जाने में आना-कानी कर रहे थे। हम वहाँ खडे-खडॆ सोच ही रहे थे कि क्या करे? कि तभी एक आल्टो वाला हमारे सामने आकर रुक गया और बोला काठगोदाम जाना है क्या? वैसे हमे जाना तो था ही, जिस कारण हम उसकी कार में बैठ गये। थोडी दूर जाने पर हमने उससे किराये के बारे में जानना चाहा तो उससे बताया कि 150 रु एक सवारी के लूँगा। हमने प्रति सवारी सौ रुपये उसको बोले लेकिन सौ पर वह नहीं माना जिस कारण हम एक बार फ़िर वहीं पर उतर गये। सामने ही सरकारी बसों का अडडा था जहाँ से कई जगहों की बसे चलती है। यह बस अडडा नैनीताल झील के सबसे निचले किनारे पर बना हुआ है। यहाँ जाकर मैंने दिल्ली की बस के बारे में पता करना चाहा। लेकिन काफ़ी छानबीन के बाद भी दिल्ली की ओर जाने वाली बस के बारे में सही जानकारी ना मिल सकी। उस समय वहाँ से सिर्फ़ स्थानीय बसे ही चल रही थी।
जब हम तीनों नैनी ताल झील से नाव भ्रमण करके बाहर आये तो समय देखा, कि अभी तो पाँच बजने वाले है, मेरा अब यहाँ कुछ और देखने का मन नहीं था जिस कारण दिल्ली की ओर चलने का कार्यक्रम बनने लगा, लेकिन अपने दोनों साथी का मूड देखा लो लग रहा था कि ये दोनों अभी यहाँ से चलने वाले नहीं है, इन्होंने अभी अपनी पीने की हसरत पूरी करनी थी जिस कारण यह जाने में आना-कानी कर रहे थे। हम वहाँ खडे-खडॆ सोच ही रहे थे कि क्या करे? कि तभी एक आल्टो वाला हमारे सामने आकर रुक गया और बोला काठगोदाम जाना है क्या? वैसे हमे जाना तो था ही, जिस कारण हम उसकी कार में बैठ गये। थोडी दूर जाने पर हमने उससे किराये के बारे में जानना चाहा तो उससे बताया कि 150 रु एक सवारी के लूँगा। हमने प्रति सवारी सौ रुपये उसको बोले लेकिन सौ पर वह नहीं माना जिस कारण हम एक बार फ़िर वहीं पर उतर गये। सामने ही सरकारी बसों का अडडा था जहाँ से कई जगहों की बसे चलती है। यह बस अडडा नैनीताल झील के सबसे निचले किनारे पर बना हुआ है। यहाँ जाकर मैंने दिल्ली की बस के बारे में पता करना चाहा। लेकिन काफ़ी छानबीन के बाद भी दिल्ली की ओर जाने वाली बस के बारे में सही जानकारी ना मिल सकी। उस समय वहाँ से सिर्फ़ स्थानीय बसे ही चल रही थी।
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