भीमताल, नौकुचियाताल, सातताल ये तीनों ताल भीमताल के ओशो आश्रम में रहते हुए आराम से देख डाले थे। पहले दिन में भीमताल व नौकुचियाताल दोनों एक साथ देख लिये गये थे दूसरे दिन सातताल देख लिया गया था। इन तीनों तालों को देखने के लिये मैंने तो पैदल ही भ्रमण किया था। लेकिन सभी लोग ऐसा नहीं कर पाते है अत: जिसे जैसा अच्छा लगे वो उसी प्रकार इन स्थलों पर जरुर घूम कर आये। यह तो मैंने पहले ही बता दिया था कि ओशो आश्रम वालों ने जब यह कहा था कि बिना गाऊन पहने कोई सभा में नहीं आयेगा। अपुन ठहरे घुमक्कड प्रजाति के प्राणी ओशो के भक्त-वक्त तो थे नहीं जिससे कि मेरे ऊपर उनके प्रवचन का तनिक मात्र भी कुछ प्रभाव पडता। ले दे के जाटॊं के एकमात्र देव है महादेव अत: जब कभी मौका मिलता है तो उनके कुछ आसान से (मेरे लिये आसान है सभी के लिये नहीं) ठिकाने पर मैं जयराम जी की करने चला जाता हूँ।
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मार्ग में एक घर की छत के बीच से निकला हुआ पेड है।इस यात्रा की शुरुआत देखने के लिये यहाँ चटका लगाये
