मंगलवार, 6 दिसंबर 2011

DEHRADOON TO DELHI देहरादून से दिल्ली

हर की दून बाइक यात्रा-
चकराता से देहरादून तक आने में पूरे 3 घन्टे लग गये थे। देहरादून के स्टेशन पर ठीक 11 बजे पहुँचे, वहाँ रेलवे आरक्षण केन्द्र पर भीड देखकर सांगवान के होश ही उड गये। फ़िर भी उसने प्रयत्न जारी रखा कि कैसे भी बात बने, लेकिन पूरे एक घन्टा बीत जाने पर भी जब किसी तरह भी उम्मीद नहीं रही कि अब काऊंटर बाबू तक पहुँचने में अभी घन्टा और लग जायेग, तो सांगवान बाहर आ गया, मैं भी घन्टे भर से अपनी बाइक पर बैठा-बैठा सांगवान को मन ही मन में उल्टी-सीधी बके जा रहा था कि बडा आया पैसे बचाने के लिये अब 12 बजने वाले है लगता है कि अब शाम 7:50 बजे की राजधानी भी निकल जायेगी। राजधानी का टिकट तो तत्काल में कराया गया था उसके तो टिकट वापसी में कुछ भी नहीं मिलने वाला था। अब सांगवान ने वो टिकट वहाँ के पार्किंग वाले को मुफ़्त में देने की कोशिश की, लेकिन उसने भी यह कहकर टिकट नहीं लिया कि इतनी भीड में कौन लाईन में लगेगा। आखिर सांगवान ने गुस्से में वो टिकट वहीं फ़ाड दिया, टिकट फ़ाडा यानि पूरे 450 रु गये काम से। 

देहरादून स्टेशन के बाहर का फ़ोटो है, ठीक 12 बजे लिया गया था।

शनिवार, 3 दिसंबर 2011

LARGEST PINE TREE TRUNK IN ASIA एशिया का सबसे मोटा चीड/देवदार पेड/वृक्ष


   इस यात्रा का पहला भाग यहाँ है।                               इस यात्रा का इस पोस्ट से पहला भाग यहाँ है।

एशिया के सबसे लम्बे पेड की समाधी देखने के बाद आज रात तक चकराता से आगे पौंटा साहिब के पास तक जाने का इरादा था। लेकिन यही(लम्बे पेड के पास) शाम के चार बजने वाले थे, जिस कारण चकराता पहुँचना सम्भव नहीं दिख रहा था। लम्बे पेड के पास मुश्किल से 15-20 मिनट रुकने के बाद हम अपने आगे से सफ़र पर चल दिये थे। हम अभी कोई 8-10 किमी ही गये होंगे कि तभी एक बोर्ड नजर आया जिस पर कुछ लिखा था। बाइक रोकने के बाद देखा तो उस पर लिखा था, हनोल देवता प्राचीन शिव मंदिर। ये मन्दिर कोई 1500-1600 वर्ष पुराना बना हुआ है। इसके बारे में एक विशेष बात और पता चली कि उतराखण्ड सरकार इसको यमुनौत्री, गंगौत्री, केदारनाथ व बद्रीनाथ के साथ पाँचवे धाम के रुप में अगले सीजन यानि 2012 में प्रचारित करने जा रही है। यह मन्दिर सडक से सौ मी की दूरी पर ही है, सडक के साथ ही एक विश्राम भवन भी बना हुआ है जो कि यहाँ आने वाले लोगों के बहुत काम का है अगर कोई यहाँ आना चाहता है तो यहाँ तक आने व रुकने में कोई समस्या नहीं है। मैंने दूर से भगवान जी को जाट देवता का नमस्कार किया व फ़िर कभी आमने-सामने होने की कह आगे की ओर चल दिया। आप भी सोच रहे होंगे कि इस मन्दिर को क्यों छोडा? बताता हूँ अगर मैंने इसे भी देख लिया होता तो अगली बार यहाँ इतनी दूर आने का कोई कारण नहीं रहता।  
ये है भारत का सबसे मोटा चीड का पेड।

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