संजय @ मो सम कौन ? said...
सॉरी भाई, एक साथ पढ़ने के चक्कर में एक-एक पोस्ट नहीं पढ़ी थी, यूँ समझ लो नीरज की तरह रपट गया था: अब एक एक पोस्ट पढ़नी पड़ेगी, लेकिन मन में उल्लास है कि पूरी तफ़सील से चौकड़ी की घुमक्कड़ी समझने को मिलेगी।
जवाब------क्रम से पढो, इस सफ़र में ना पढने में, ना ही चलने में शार्टकट ठीक नहीं है।
Vidhan Chandra said...
एक बात तो तय है की आप लोग यात्रा का मजा नहीं लेते हैं , रिकार्ड बनाने की "धुन" में रहते है!! नीरज भी कोई भगवान नहीं है ! इन्सान ही है, उसे पछाड़ने के चक्कर में अगर आप कहीं (भगवान न करे ) गिर जाते या आप को कुछ हो जाता तो? हम घुमक्कड़ हैं और उसका आनंन्द स्वयं के लिए लेते हैं , वो अलग बात है कि ब्लॉग के जरिये अपनी भावनाएं दूसरों से शेयर कर लेते हैं. बीस मिनट लेट ही सही नीरज पहुंचा न आप के पास अगर मैं होता तो एक घंटा लेट होता! अगर हमें जल्दी नहीं है तो बिना बात जल्दी क्यों करें संदीप जी !! आपके फोटो अच्छे हैं , नीरज कि सलाह मानकर फोटो वाटरमार्क नहीं किये इसके लिए धन्यवाद!!
जवाब------घुमक्कड़ तो हर तरह का मजा उठाते है कभी तेज कभी धीमे, जब सभी तेज चल सकते हो तो क्यों नहीं चले? पहले जाने वाले को आराम भी सबसे ज्यादा मिलता है। उस समय कुछ तो उन्हे उतराई की रफ़्तार भी दिखानी थी दूसरी बारिश होने का डर भी था जिससे कि मार्ग फ़िसलन भरा हो जाता, रात की बारिश ने तो वैसे ही ऐसी-तैसी की हुई थी।
मदन शर्मा said...
मैं समय न मिलने और कुछ व्यक्तिगत कारणों से बहुत देर से पहुँच पाया ....माफी चाहता हूँ. बहुत सुन्दर चित्र मय प्रस्तुति लेकिन एक बात याद रखिये ये तीर्थ स्थल हमें एक दुसरे से जोड़ने के लिए ही बनाये गए हैं देवी देवताओं की पूजा तो एक बहाना है एक दुसरे के नजदीक आने का !!