पहले दिन सवा चार सौ किलोमीटर बाइक चलाने के बाद भी, रात में माता के दर्शन पैदल किये, उसके बाद भी सिर्फ़ तीन घंटे सोये, हम सब घर जाने के लिये उतावले थे। सब नहा धोकर, सुबह साढे नौ बजे अपने प्यारे घर की और चल दिये। आज उस मार्ग से नहीं जाना था जिससे कल आये थे। आधे घंटे बाद हम जम्मू-श्रीनगर हाइवे पर आ गये थे। जम्मू की ओर जाते समय, हमें जम्मू बाईपास से जाना था, लेकिन मेरे दोनों बाइक वाले साथी कुछ ज्यादा ही तेजी से जा रहे थे, बाईपास को देखा ही नहीं, और घुस गये जम्मू सिटी की भीड में, जबकि मैं बाईपास से होता हुआ सीधा सांबा जा निकला, व यहाँ एक भंडारे पर भोले का प्रसाद दाल मखनी व तंदूरी रोटी ग्रहण किया। जब तक उन दोनों ने जम्मू पार ही किया था। अब तय हुआ कि कठुआ या पठानकोट पार करने के बाद उस मोड पर मिलंगे, जहाँ से एक मार्ग चम्बा, धर्मशाला, मण्डी की ओर जाता है व दूसरा जालंधर, लुधियाना, अम्बाला, दिल्ली की ओर, लेकिन पठानकोट में फ़िर गडबड हो गयी। ये चारों पठानकोट से जालंधर वाले मार्ग पर ना आकर, सीधे हाथ अमृतसर की ओर चले गये।
बुधवार, 1 जून 2011
रविवार, 22 मई 2011
बाइक से लाल किला से लेह-लद्दाख यात्रा भाग 10, PATNI TOP, VAISNHO DEVI TEMPLE
लेह बाइक यात्रा-
आखिरकार पल्सर वाले भी हमारे साथ आ गये। इनसे पूछा गया कि रात में कहाँ थे तो इन्होंने बताया कि हम रात को बारह बजे बाल्टाल आये थे। जिस कारण सुबह जल्दी आँख नहीं खुली, रही बात मोबाइल की तो वो तो चार्ज ही नहीं था, तो मिलता कैसे, नेटवर्क भी सिर्फ़ बी.एस.एन.एल. का ही था। उनका सिम एयरटेल का था। अब हम जहाँ पर है, पटनी टाप नाम है इस जगह का, पत्नी टाप बोलते है ज्यादातर लोग, वैसे है, बडी शानदार जगह, हरियाली तो कूट-कूट कर भरी हुई लगती है। जाडॆ में यहाँ जमकर बर्फ़बारी का मजा लिया जाता है, लेकिन हम ऐसी बर्फ़बारी से होकर आये है, कि अब तो हमें बर्फ़बारी के नाम से ही ठण्ड लगने लगने लगती है। यहाँ के कई फ़ोटो खींचे, हर तरफ़ हरा-हरा नजर आता है
सदस्यता लें
संदेश (Atom)

